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Dharamkira

सम्पूर्ण योग

नौकासन

नौकासन — नाव मुद्रा

नौका = नाव — नाव-सा सधा शरीर

टाँगें ऊपर, छाती ऊपर, धरती पर केवल नितम्ब — नाव को आपका पूरा मध्य थामे है।

मध्यमअवधि: 10–30 सेकंड, 2–3 आवृत्ति।

सबसे सरल शब्दों में

बैठो, थोड़ा पीछे झुको, और टाँगें उठाओ ताकि शरीर 'V' बन जाए — पानी पर नाव जैसा! बाँहें चप्पुओं-सी आगे। पेट काँपे तो समझो नाव बढ़िया चल रही है।

यह क्या है

नितम्ब-अस्थियों पर संतुलन साधिए, टाँगें ऊपर तैराइए, सीधी पीठ वाला धड़ उनसे मिलने झुकाइए, और बाँहें आगे तान दीजिए: शरीर 'V' बन जाता है — अपनी ही पेंदी पर तिरती नाव। न पलटने का श्रम पेट और पीठ मिलकर उठाते हैं — इसीलिए नौकासन परम्परा का सबसे सीधा कोर-निर्माता है, बिना किसी उपकरण के। काँपना असफलता नहीं, स्वयं व्यायाम है; मुड़े घुटनों की नाव भी उतनी ही सच्ची तैरती है जितनी सीधी टाँगों की।

अभ्यास से पहले — स्वास्थ्य सर्वोपरि

गर्भावस्था, हाल की पेट-शल्यक्रिया और हर्निया में न करें; निम्न रक्तचाप में ठहराव छोटे। कमर-दर्द में घुटने मोड़कर जाँघें थामें — या विश्राम करें।

आसन में कैसे आएँ

  1. घुटने मोड़कर बैठें, पैर टिके, हाथ जाँघों के पीछे।

  2. नितम्ब-अस्थियों पर संतुलन को पीछे झुकें, रीढ़ लम्बी — गोल कभी नहीं।

  3. पिंडलियाँ धरती के समानान्तर तैराएँ; यहीं प्रसन्न ठहरें, या टाँगें सीधी करें।

  4. बाँहें घुटनों के पास आगे तानें, हथेलियाँ भीतर।

  5. सम साँस में ठहरें, फिर साँस छोड़ते हुए पैर उतारकर विश्राम करें।

श्वास

यहाँ साँस कभी न रोकें — नाव सधी साँस पर ही चलती है।

किसलिए किया जाता है

कोर व कूल्हे के बल, मुद्रा का आधार, और वह स्थिरता जिस पर बैठी साधनाएँ चुपचाप टिकी हैं।

इन क्रमों का अंग