
कृष्ण-सत्यभामा; चौदस रूप में काली
नरक चतुर्दशी (छोटी दीवाली)
जिस भोर नरकासुर गिरा — सूर्योदय-पूर्व तेल-स्नान, और छोटी दीवाली के पहले दीप।
तिथि: कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी (उत्तर) · आश्विन कृष्ण चतुर्दशी (पश्चिम-दक्षिण) — रात वही है
आप कौन-सा पंचांग मानते हैं?
शुक्ल पक्ष का नाम हर जगह एक ही है। कृष्ण पक्ष उत्तर में एक मास का होता है और महाराष्ट्र, गुजरात व दक्षिण में उससे पिछले मास का — रात वही, नाम दो, और दोनों सही। चुनाव केवल इसी उपकरण पर रहता है।
सबसे सरल शब्दों में
छोटी दिवाली — वह भोर जब कृष्ण ने नरकासुर से सोलह हज़ार बंदियों को मुक्त किया; सूर्योदय से पहले का अभ्यंग स्नान साल का अँधेरा धो देता है।
कथा और उद्देश्य
प्राग्ज्योतिष का नरकासुर उन्मत्त हो चुका था — सोलह सहस्र बंदिनियाँ, देवताओं के कोष तक छीने। कृष्ण सत्यभामा सहित निकले, और कई कथनों में उसका अंत भोर में सत्यभामा के बाण से हुआ। मरते असुर का वर: यह दिन दीपों और आनंद से मने। बंदिनियों को सम्मान लौटाया गया।
इसलिए दिन सूर्योदय से पहले खुलता है: चंद्र रहते तेल-उबटन का अभ्यंग स्नान — मान्यता में स्वयं नरक को धो देने वाला। गोवा भोर में नरकासुर के पुतले जलाता है; बंगाल यह रात चौदह पुरखों के चौदह दीपों वाली 'भूत चतुर्दशी' रखता है; दक्षिण के लिए यही भोर मुख्य दीपावली है।
क्या किया जाता है
अभ्यंग स्नान
सूर्योदय-पूर्व तिल-तेल मर्दन और उबटन-स्नान — दिन का मुख्य विधान।
यम दीप
गोधूलि में दक्षिणाभिमुख चौमुखा यम-दीप (अनेक घरों में यह धनतेरस को)।
प्रथम दीपमाला
छोटी दीवाली की पंक्तियाँ प्रज्वलित; महारात्रि हेतु रंगोली नई।
कृष्ण स्मरण
अभ्यंग के समय कृष्णाय वासुदेवाय — उद्धारक का मंत्र।
श्रेष्ठ समय
अभ्यंग स्नान सूर्योदय-पूर्व अंतिम मुहूर्त में, चंद्र रहते।
सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।
जानने योग्य
2026 में चतुर्दशी-अमावस्या 8 नवंबर को साथ हैं — भोर में अभ्यंग, रात्रि में लक्ष्मी-पूजा; प्रकाश का एक लंबा दिन।
गुजरात में यह रात 'काली चौदस' है — नववर्ष से पूर्व माता से बल की प्रार्थना।
'रूप चौदस' भी नाम है: भोर का स्नान वर्ष का सौंदर्य-विधान।