देवी
काली मंत्र
ॐ क्रीं कालिकायै नमः
Oṁ Krīṁ Kālikāyai Namaḥ
सरल उच्चारण: Om kreem kaa-li-kaa-yai na-mah
इस मंत्र के विषय में
काली — काल-स्वरूपा जगदम्बा — का बीज-मंत्र। वह उग्र करुणा जो भय को काटती है और बंधनों का अंत करती है।
अर्थ
ॐ — क्रीं — कालिका को प्रणाम। बीजाक्षर तीखा है, क्योंकि वे भी हैं: काली साक्षात् काल हैं — वह माँ जो समाप्त हो चुके का अंत करती हैं, ताकि जिसे जीना है वह जी सके। उनके भक्त इस प्रचंडता को पूर्ण बल पर पहुँची ममता कहते हैं। साधक अपने सबसे बड़े भय — अंत — को प्रणाम करता है, और उस पर माँ का मुख पाता है।
कब जपें
काली पूजा की रात और अमावस्या की संध्याओं में इसका विशेष जाप होता है; अंतों पर — आदतों, अध्यायों, भयों के — और उस शोक में जिसे कोमल नहीं, प्रचंड माँ चाहिए।
शब्द-दर-शब्द
- ॐoṁ
- प्रणव, आदि नाद
- क्रींkrīṁ
- काली का बीज-मंत्र
- कालिकायैkālikāyai
- कालिका के लिए
- नमःnamaḥ
- प्रणाम, नमन
स्रोत: देवी-उपासना परंपरा का पारंपरिक बीज-मंत्र
टिप्पणी: यहाँ प्रचलित रूप दिया गया है; कुल और क्षेत्रीय परंपराओं में शब्द-रूप थोड़ा भिन्न हो सकता है।

