सीधे सामग्री पर जाएँ
Dharamkira
त्योहार पंचांग
खुले केश और माला धारण किए, खड्ग उठाए, लेटे हुए शिव पर खड़ी श्याम-वर्णा देवी काली — रवि वर्मा प्रेस का चित्र।
कालीराजा रवि वर्मा / रवि वर्मा प्रेस, c. 1910

काली (श्यामा)

काली पूजा

जब पश्चिम लक्ष्मी-दीप जलाता है, बंगाल मध्यरात्रि में साँवली माँ को पुकारता है।

बंगाल, असम और ओडिशा
रविवार, 8 नवंबर 2026शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2027

तिथि: कार्तिक अमावस्या — दीवाली की रात्रि (उत्तर) · आश्विन अमावस्या — दीवाली की रात्रि (पश्चिम-दक्षिण)रात वही है

आप कौन-सा पंचांग मानते हैं?

शुक्ल पक्ष का नाम हर जगह एक ही है। कृष्ण पक्ष उत्तर में एक मास का होता है और महाराष्ट्र, गुजरात व दक्षिण में उससे पिछले मास का — रात वही, नाम दो, और दोनों सही। चुनाव केवल इसी उपकरण पर रहता है।

सबसे सरल शब्दों में

बंगाल की दीपावली-रात माँ काली की है — उग्र, श्याम और असीम ममतामयी — आधी रात को साहस-से लाल जवा फूलों से पूजित।

कथा और उद्देश्य

दीवाली की उसी अमावस्या को बंगाल श्यामा की ओर मुड़ता है — काली: काल भी, माता भी; अहंकार जिनसे सबसे अधिक डरता है उन्हीं की माला पहने, और संतानों पर अभय-मुद्रा ताने। विरोधाभास ही मर्म है: जो संतान बनकर आते हैं, उनके लिए महाभयंकरी नितांत कोमल हैं।

आधुनिक उत्सव पर रामकृष्ण के दक्षिणेश्वर की गहरी छाप है, जहाँ पुजारी भवतारिणी से नित्य-सत्य की तरह बोलते थे। दुर्गा की भाँति पंडाल सजते हैं; जबा (गुड़हल) की मालाएँ और खिचुड़ी-भोग रात की पहचान हैं, और पूजा मध्यरात्रि की अमावस्या-बेला में होती है।

काली को वही अर्पित होता है जो उनके बच्चे खाते हैं — चावल, मछली, मिठाई — क्योंकि माँ की पूजा दूर से नहीं होती।

क्या किया जाता है

मध्यरात्रि पूजा

अमावस्या की गहनतम बेला में 108 जबा और 108 दीपों से माँ का आवाहन।

गृह श्यामा पूजा

सरल गृहस्थ-पूजा: प्रतिमा, रक्तपुष्प, मिठाई और निष्कपट वाणी — और कुछ वे स्वीकारती ही नहीं।

दीपदान

भूत चतुर्दशी के चौदह दीप रात्रि की पूर्ण दीपमाला में विलीन।

काली जाप

ॐ क्रीं कालिकायै नमः — 108 बार, निर्भय और सप्रेम।

श्रेष्ठ समय

पूजा अमावस्या के निशिता (मध्यरात्रि) काल में।

सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।

जानने योग्य

  • कालीघाट और दक्षिणेश्वर में रात-भर पंक्तियाँ; तारापीठ भोर तक जगमगाता है।

  • असम अपनी शक्तिपीठों में यही रात काली की रखता है; ओडिशा चाँदी की तारकशी वाली श्यामा की।

  • रामप्रसाद-कमलाकांत का श्यामा-संगीत आज की रात का स्वर है — गुनगुनाया जा सकने वाला तत्त्वज्ञान।

इस पर्व के मंत्र