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Dharamkira
त्योहार पंचांग
चँदोवे के नीचे लाल साड़ी में सिंहासनासीन देवी, सेविकाएँ पंखा झल रही हैं, चरणों में वीणा-वादिका — रवि वर्मा प्रेस का "अम्बिका" शीर्षक चित्र।
अम्बिका रूप में पार्वती, जगन्मातारवि वर्मा प्रेस, मालवली, early 20th century

पार्वती और शिव

कजरी तीज

कजरी गीतों की तीज — सावन-भादों का साँवला आकाश, और उस पार गाया गया प्रेम।

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान
शुक्रवार, 20 अगस्त 2027

तिथि: भाद्रपद कृष्ण तृतीया (उत्तर) · श्रावण कृष्ण तृतीया (पश्चिम-दक्षिण)रात वही है

आप कौन-सा पंचांग मानते हैं?

शुक्ल पक्ष का नाम हर जगह एक ही है। कृष्ण पक्ष उत्तर में एक मास का होता है और महाराष्ट्र, गुजरात व दक्षिण में उससे पिछले मास का — रात वही, नाम दो, और दोनों सही। चुनाव केवल इसी उपकरण पर रहता है।

सबसे सरल शब्दों में

गीतों वाली कजरी तीज — स्त्रियाँ सावनी बादलों तले कजरी गाती हैं, परिवार के लिए व्रत रखती हैं, और झूलों संग मौसम का स्वागत करती हैं।

कथा और उद्देश्य

कजरी — 'काजल' से, भादों के कज्जल-श्याम मेघ — जितना व्रत है उतना ही संगीत। मिर्ज़ापुर, बनारस, बुंदेलखंड की कजरी विधा में सावन की प्रोषितपतिका की प्रतीक्षा बसती है; इस तृतीया को स्त्रियाँ व्रत रखतीं, गौरी-शिव पूजतीं और झूलों तले गाती हैं।

इस दिन की ठेठ पहचान है सत्तू — गुड़ से मीठा किया भुना बेसन — जो अर्पित होता है और चंद्रोदय पर पारण में ग्रहण किया जाता है। राजस्थान-मध्य प्रदेश के अंचलों में यह 'बड़ी तीज' है, जिसमें संध्या को नीम की डाल — नीमड़ी माता — की पूजा होती है।

क्या किया जाता है

व्रत और गौरी पूजा

दिवस-व्रत, पार्वती-शिव पूजन; हर तीज की भाँति हरित वस्त्र-शृंगार।

नीमड़ी माता

राजस्थानी रीति में संध्या को नीम-डाल का जल, रोली, अक्षत से पूजन।

सत्तू और चंद्रोदय पारण

चंद्र-दर्शन पर पारण — पहले सत्तू।

कजरी गायन

ऋतु के गीत — मंडली में या अकेले — व्रत का जीवित लोक-पक्ष।

श्रेष्ठ समय

पूजा दिन में; पारण चंद्रोदय के बाद।

सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।

जानने योग्य

  • मिर्ज़ापुर के कजरी अखाड़े भादों-भर गायकी के 'दंगल' रखते हैं — काव्य का क्रीड़ा-रूप।

  • कजरी तीज रक्षाबंधन के तीन दिन बाद और जन्माष्टमी से पाँच दिन पूर्व, कृष्ण के ही कृष्णपक्ष में आती है।

  • राजस्थान का बूँदी इसे तीज माता की सवारी वाले राजसी मेले के रूप में मनाता है।

इस पर्व के मंत्र