सीधे सामग्री पर जाएँ
← मंत्र संग्रह

देवी

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

सरल उच्चारण

Sar-va man-ga-la maan-gal-ye shi-ve sar-vaar-tha saa-dhi-ke, sha-ran-ye tra-yam-ba-ke gau-ri naa-raa-ya-ni na-mo-stu te

Sarva-maṅgala-māṅgalye śive sarvārtha-sādhike, śaraṇye tryambake gauri nārāyaṇi namo'stu te

भक्तिरक्षासमृद्धि

इस मंत्र के विषय में

देवी के सर्वाधिक प्रिय श्लोकों में से — घर-घर और मंदिरों में गाया जाता है, जगदम्बा को समस्त मंगलों के मंगल रूप में नमन।

अर्थ

हे समस्त मंगलों की मंगलमयी, हे शिवा, सब प्रयोजन सिद्ध करने वाली, शरण देने वाली, त्रिनेत्रा गौरी, नारायणी — आपको नमस्कार। विशेषण वलय-दर-वलय फैलते हैं — मंगल, सिद्धि, शरण — जब तक 'नारायणी' उन सबको समेट नहीं लेतीं; और श्लोक उसी एक शेष भाव में विश्राम पाता है: नमोऽस्तु ते — आपको मेरा प्रणाम।

मंत्र कंठस्थ करें

पहली पंक्ति तब तक बोलें जब तक वह बिना पढ़े न आ जाए, फिर अगली पंक्ति जोड़कर दोनों बोलें, जब तक पूरा मंत्र अपने आप न आ जाए।

2 में से पंक्ति 1

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।

Sarva-maṅgala-māṅgalye śive sarvārtha-sādhike, śaraṇye tryambake gauri nārāyaṇi namo'stu te

0अभी नहीं बोला

अगली पंक्ति से पहले ग्यारह बार का लक्ष्य रखें। जब पंक्ति बिना पढ़े आ जाए, तब आगे बढ़ें।

प्रगति केवल इसी डिवाइस पर रहती है।

कब जपें

देवी-पूजा और आरती का समापन; शुक्रवार को, नवरात्रि भर, और दहलीज़ के क्षणों में — विदाई, परिणाम, घर-वापसी — जहाँ आशीर्वाद माँगा जा रहा हो।

शब्द-दर-शब्द

सर्वमङ्गलमाङ्गल्येsarva-maṅgala-māṅgalye
समस्त मंगलों की मंगलमयी
शिवेśive
हे शिवा (कल्याणमयी)
सर्वार्थसाधिकेsarvārtha-sādhike
सब प्रयोजन सिद्ध करने वाली
शरण्येśaraṇye
शरण देने वाली
त्र्यम्बकेtryambake
त्रिनेत्रा
गौरि नारायणिgauri nārāyaṇi
हे गौरी, हे नारायणी
नमोऽस्तु तेnamo'stu te
आपको नमस्कार

स्रोत: दुर्गा सप्तशती ११.१० (देवी माहात्म्य)

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Sarva-maṅgala-māṅgalye śive sarvārtha-sādhike, śaraṇye tryambake gauri nārāyaṇi namo'stu te

लक्ष्य
·

इस डिवाइस पर कुल: 0 · केवल इसी डिवाइस पर सुरक्षित