देवी
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
Sarva-maṅgala-māṅgalye śive sarvārtha-sādhike, śaraṇye tryambake gauri nārāyaṇi namo'stu te
सरल उच्चारण: Sar-va man-ga-la maan-gal-ye shi-ve sar-vaar-tha saa-dhi-ke, sha-ran-ye tra-yam-ba-ke gau-ri naa-raa-ya-ni na-mo-stu te
इस मंत्र के विषय में
देवी के सर्वाधिक प्रिय श्लोकों में से — घर-घर और मंदिरों में गाया जाता है, जगदम्बा को समस्त मंगलों के मंगल रूप में नमन।
अर्थ
हे समस्त मंगलों की मंगलमयी, हे शिवा, सब प्रयोजन सिद्ध करने वाली, शरण देने वाली, त्रिनेत्रा गौरी, नारायणी — आपको नमस्कार। विशेषण वलय-दर-वलय फैलते हैं — मंगल, सिद्धि, शरण — जब तक 'नारायणी' उन सबको समेट नहीं लेतीं; और श्लोक उसी एक शेष भाव में विश्राम पाता है: नमोऽस्तु ते — आपको मेरा प्रणाम।
कब जपें
देवी-पूजा और आरती का समापन; शुक्रवार को, नवरात्रि भर, और दहलीज़ के क्षणों में — विदाई, परिणाम, घर-वापसी — जहाँ आशीर्वाद माँगा जा रहा हो।
शब्द-दर-शब्द
- सर्वमङ्गलमाङ्गल्येsarva-maṅgala-māṅgalye
- समस्त मंगलों की मंगलमयी
- शिवेśive
- हे शिवा (कल्याणमयी)
- सर्वार्थसाधिकेsarvārtha-sādhike
- सब प्रयोजन सिद्ध करने वाली
- शरण्येśaraṇye
- शरण देने वाली
- त्र्यम्बकेtryambake
- त्रिनेत्रा
- गौरि नारायणिgauri nārāyaṇi
- हे गौरी, हे नारायणी
- नमोऽस्तु तेnamo'stu te
- आपको नमस्कार
स्रोत: दुर्गा सप्तशती ११.१० (देवी माहात्म्य)

