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Dharamkira
त्योहार पंचांग
स्वर्णिम धोती में बाँसुरी बजाते कृष्ण और पास खड़ी राधा, पीछे दो श्वेत गायें और महल के स्तंभ — 1897 का क्रोमोलिथोग्राफ।
राधा को बाँसुरी सुनाते कृष्णअज्ञात प्रेस, क्रोमोलिथोग्राफ, 1897

विष्णु (नृसिंह) · कृष्ण

होली

होलिका की अग्नि, और फिर वह दिन जब सारा देश रंगों में खेलता है।

होलिका दहन: मंगलवार, 3 मार्च 2026रंगवाली होली: बुधवार, 4 मार्च 2026होलिका दहन 2027: रविवार, 21 मार्च 2027रंगवाली होली 2027: सोमवार, 22 मार्च 2027

तिथि: फाल्गुन पूर्णिमा (दहन); प्रतिपदा (रंग)

सबसे सरल शब्दों में

रंगों का त्योहार! पहले होलिका की अग्नि बुराई जलाती है, और अगली सुबह सब गुलाल खेलते हैं — जब तक हर चेहरा इंद्रधनुष न बन जाए।

कथा और उद्देश्य

पूर्व संध्या प्रह्लाद की कथा है — वह बालक जिसकी भक्ति को अग्नि छू न सकी, जबकि उसे लेकर बैठी होलिका जल गई। बुराई स्वयं भस्म हुई; श्रद्धा अक्षत निकली।

अगली सुबह कृष्ण के व्रज की है — जहाँ रंग ने आयु, पद और मन-मुटाव का हर भेद मिटा दिया। बुरा न मानो, होली है।

ब्रज इस उत्सव को कई दिनों में फैला देता है — वृन्दावन की फूलों वाली होली, मंदिरों में स्वयं ठाकुर जी के साथ खेला गया रंग, और मथुरा में सप्ताह-भर।

क्या किया जाता है

होलिका दहन

सूर्यास्त बाद प्रदोष में सामूहिक अग्नि — परिक्रमा और नई फसल के दाने अर्पित।

रंग खेलना

प्रातः गुलाल और रंग; दोपहर स्नान, मिठाई और मिलने-मिलाने की।

गुझिया-ठंडाई

पर्व का स्वाद, पड़ोसियों से बाँटा हुआ।

श्रेष्ठ समय

दहन प्रदोष काल में, भद्रा टालकर; रंग अगली सुबह।

सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।

जानने योग्य

  • बरसाना में कुछ दिन पहले लट्ठमार होली — राधा के गाँव की स्त्रियाँ कृष्ण के गाँव के पुरुषों पर लाठियाँ बरसाती हैं।

  • कुमाऊँ की बैठकी होली — पर्व शास्त्रीय संगीत की बैठकों के रूप में।

  • पारंपरिक रंग टेसू (पलाश) का जल, हल्दी और नीम थे — वनस्पति रंग, जिन्हें अनेक लोग कृत्रिम गुलाल से पहले वसंत की त्वचा-औषधि भी मानते हैं।

इस पर्व के मंत्र

टिप्पणी: दहन का समय भद्रा पर निर्भर है; कुछ क्षेत्र पूर्णिमा को ही रंग खेलते हैं।