सीधे सामग्री पर जाएँ
Dharamkira
पूजा विधि
जल पर शेषनाग की कुंडली पर विराजमान विष्णु, पीछे उठे नाग-फन, दोनों ओर उनकी पत्नियाँ — राजा रवि वर्मा पर आधारित क्रोमोलिथोग्राफ।
शेष पर अपनी दो पत्नियों सहित विष्णुराजा रवि वर्मा के चित्र पर आधारित क्रोमोलिथोग्राफ, c. 1890s

विष्णु (प्रह्लाद-रक्षक) और अग्नि · अग्नि के पास 30–45 मिनट

होलिका दहन विधि

फाल्गुन पूर्णिमा संध्या (21 मार्च 2027)

सबसे सरल शब्दों में

होली से पहले होलिका दहन, विधिवत: चिता, प्रह्लाद की कथा जिसने विष्णु पर भरोसा नहीं छोड़ा, और लपटों के चारों ओर बँटा भुना अनाज।

रंगों से पहले की रात एक अग्नि सबसे पुराना पाठ दोहराती है: होलिका का वरदान क्रूरता की सेवा में निष्फल हुआ, और विश्वास में बैठा बालक तनिक न जला। उसी अग्नि के चारों ओर घर अपने वर्ष की ज्वलनशील वस्तुएँ सौंपते हैं — द्वेष, भय, अहं की सूखी लकड़ियाँ।

यह पूजा करें

5 चरण, एक-एक करके — दीये, मंत्रों और घंटी के साथ, इसी स्क्रीन पर।

सामग्री

0/4 एकत्र

विधि, चरण-दर-चरण

0/5 पूर्ण
  1. प्रज्वलन-पूर्व पूजन

    सजी होलिका के प्रज्वलन-पूर्व: रोली-अक्षत, पुष्प, चुटकी गुलाल, नारियल, और मोली की (3 या 7) परिक्रमा-लपेट; मूल में जल।

  2. प्रह्लाद-स्मरण

    एक श्वास में कथा — बालक, चिता, विफल गोद और अविफल नाम — द्वादशाक्षर मंत्र सहित।

    ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

    Oṁ Namo Bhagavate Vāsudevāya

    ॐ, भगवान वासुदेव को प्रणाम। वासुदेव अंतर्यामी कृष्ण हैं — 'वस्' धातु से: जिनमें सब प्राणी बसते हैं और जो सब प्राणियों में बसते हैं। बारह अक्षरों का यह मंत्र भागवत परंपरा का पूरा पथ एक पंक्ति में है — कोई माँग नहीं, एक संबोधन: भगवान के व्यक्तित्व की ओर मुड़ना और स्वयं को सौंप देना।

    स्रोत: भागवत परंपरा (श्रीमद्भागवत पुराण)

  3. मुहूर्त पर दहन

    भद्रा-रहित प्रदोष मुहूर्त में अग्नि (पंचांग में अंकित)। लोटे से जलधारा देते हुए 3 या 7 परिक्रमा।

  4. नवान्न-अर्पण

    गेहूँ-चने की बालियाँ लौ में सेंककर बाँटी जाती हैं — ऋतु का प्रथम अन्न परिवार से पहले अग्नि को स्पर्श।

  5. वर्ष की सूखी लकड़ी विसर्जन

    मौन में एक द्वेष या भय नामकर अग्नि को सौंपें। दहन के बाद एक-दूसरे के माथे पर गुलाल — होली का प्रथम रंग; अगली भोर भस्म-टीका — रंग निर्मल आरंभ हों।

टिप्पणी: दहन दृढ़ परंपरा से भद्रा-रहित मुहूर्त में — नगर-मुहूर्त भिन्न; स्थानीय पंचांग देखें। 2027 में दहन 21 मार्च, रंग 22 मार्च (होली प्रविष्टि देखें)।

होली