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Dharamkira
त्योहार पंचांग
व्याघ्रचर्म पर ध्यानमग्न बैठे शिव, सिर पर नाग-फन, पास में पार्वती और पीछे काशी के घाट — लगभग 1895 का रंगीन लिथोग्राफ।
ध्यानमग्न शिवलोकप्रिय रंगीन लिथोग्राफ, कलकत्ता (ब्रिटिश म्यूज़ियम एल्बम), c. 1895

पार्वती और शिव

हरतालिका तीज

तीजों में कठोरतम — पार्वती का अपना निर्जला व्रत, बालू के शिवलिंग के साथ।

2026 व्रत: सोमवार, 14 सितंबर 20262027 व्रत: शुक्रवार, 3 सितंबर 2027

तिथि: भाद्रपद शुक्ल तृतीया

सबसे सरल शब्दों में

सबसे कठोर तीज — जब सखियों ने पार्वती को छिपा लिया ताकि वे केवल शिव को वरने का प्रण निभा सकें। संकल्प का उत्सव।

कथा और उद्देश्य

हरत-आलिका — 'सखी द्वारा हरण': जब पर्वतराज ने पार्वती का संबंध विष्णु से ठहराया, तो सखी उन्हें घने वन में ले गई, जहाँ उन्होंने नदी की बालू का शिवलिंग रचकर बिना अन्न-जल दिन-रात आराधना की। शिव आए, और वचन दिया। यह व्रत उसी परम-संकल्प की रात को फिर जीता है।

यह तीनों तीजों में सबसे कठोर है — स्वास्थ्य अनुमति दे तो निर्जला — जो स्त्रियाँ मन-चुने साथी और उसकी दीर्घायु के लिए रखती हैं। बालू/मिट्टी का शिवलिंग, संग गौरी; रात्रि-जागरण में कथा-गीत; प्रातः विसर्जन से वृत्त पूर्ण।

क्या किया जाता है

बालू का शिवलिंग

बालू या मिट्टी से शिव-गौरी रचकर प्रदोष काल में शृंगार-पूजन।

निर्जला व्रत

यथाशक्ति — शास्त्र कठोरता से पहले स्वास्थ्य रखता है।

रात्रि जागरण

रात्रि-प्रहरों में कथा, भोर तक भजन।

विसर्जन और पारण

प्रातः पूजन, प्रतिमा-विसर्जन, फिर पारण।

श्रेष्ठ समय

पूजा प्रदोष काल से; व्रत अगली प्रातः तक।

सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।

जानने योग्य

  • 2026 में तृतीया गणेश चतुर्थी से सट गई है — तीज और गणपति 14 सितंबर को साथ पधारते हैं।

  • नेपाल और मिथिला में यह वर्ष का महान स्त्री-पर्व है — पशुपतिनाथ लाल साड़ियों से भर उठता है।

  • कर्नाटक इसी तिथि को 'गौरी हब्बा' मनाता है — पुत्र के आगमन से एक दिन पूर्व गौरी का गृह-आगमन।

इस पर्व के मंत्र

टिप्पणी: 2026 के कुछ पंचांग (और अमेरिकी समय-क्षेत्र के कैलेंडर) 13 सितंबर मानते हैं; भारत की प्रचलित तिथि 14 सितंबर है। कर्नाटक का गौरी हब्बा इसी तिथि पर है।