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Dharamkira
त्योहार पंचांग
सिंह पर सवार, अनेक भुजाओं में शस्त्र लिए महिषासुर का वध करती देवी दुर्गा — रवि वर्मा प्रेस का चित्र।
दुर्गा महिषासुरमर्दिनीरवि वर्मा प्रेस, c. 1910

पार्वती और शिव

हरियाली तीज

हरी तीज — सावन के झूले, हाथों में मेहँदी, शिव से पार्वती का पुनर्मिलन।

उत्तर भारत
बुधवार, 4 अगस्त 2027

तिथि: श्रावण शुक्ल तृतीया

सबसे सरल शब्दों में

सावन की हरियाली तीज — पेड़ों पर झूले, हाथों में मेहँदी, और लम्बी तपस्या से शिव को पाने की पार्वती की खुशी।

कथा और उद्देश्य

जब सावन सब कुछ हरा कर चुका होता है, तीज उस दिन का उत्सव है जब दीर्घ तपस्या के बाद शिव ने पार्वती को स्वीकारा। आम-नीम की डालों पर झूले पड़ते हैं, और हरी लहरिया में स्त्रियाँ विरह-मिलन के तीज-गीत गाती हैं।

विवाहित बेटियों को पीहर से 'सिंधारा' आता है — वस्त्र, मिठाई, चूड़ी, मेहँदी — हर सावन नवीकृत होता पुराना नाता। व्रत प्रियजन की दीर्घायु के लिए, स्वयं पार्वती — तीज माता — के नाम पर।

क्या किया जाता है

तीज माता पूजा

मेहँदी, चूड़ी, हरित वस्त्र से पार्वती-पूजन; संग शिव।

झूला

सखियों संग झूलना-गाना — आनंद ही आराधना।

सिंधारा और शृंगार

पीहर की भेंट; दिन-भर सोलह शृंगार।

गौरी जाप

सर्वमंगलमांगल्ये अथवा ॐ पार्वत्यै नमः।

श्रेष्ठ समय

पूजा प्रातः; झूले-गीत अपराह्न-भर।

सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।

जानने योग्य

  • जयपुर की राजसी तीज सवारी दो संध्याओं तक परकोटे में निकलती है।

  • तीनों तीज — हरियाली, कजरी, हरतालिका — पखवाड़े-पखवाड़े पर सावन-भादों में सीढ़ी बनाती हैं।

  • घेवर तीज की मिठाई है — सावन का अपना छत्ता।

इस पर्व के मंत्र