
गुरु नानक देव जी
गुरु नानक जयंती
गुरपुरब — प्रथम गुरु का प्रकाश; प्रार्थना, प्रभातफेरी और खुले लंगर के साथ।
तिथि: कार्तिक पूर्णिमा
सबसे सरल शब्दों में
प्रकाश पर्व — गुरु नानक देव जी का जन्मदिन, जिनकी पहली सीख थी 'न कोई हिन्दू, न मुसलमान — एक ओंकार'। लंगर सबको एक समान खिलाता है।
कथा और उद्देश्य
1469 में तलवंडी — अब ननकाना साहिब — में जन्मे नानक नदी में तीन दिन अंतर्धान रहकर लौटे तो एक वाक्य से सब कुछ नया कर दिया: 'न कोई हिन्दू, न कोई मुसलमान।' जिन 'एक' को उन्होंने गाया — इक ओंकार — वे हर लेबल से परे सत्य हैं; उनका मार्ग: किरत करो, नाम जपो, वंड छको — श्रम, स्मरण, साझा।
गुरपुरब मनता है अखंड पाठ से — अड़तालीस घंटे अविराम गुरु ग्रंथ साहिब — भोर की प्रभातफेरियों, पंज प्यारों के पीछे नगर कीर्तन, और उस लंगर से जहाँ हर जाति-पंथ एक पंगत में बैठता है। कार्तिक पूर्णिमा हिन्दू-सिख को दीपों की एक साझी रात देती है।
क्या किया जाता है
अखंड पाठ
अड़तालीस घंटे का अविराम पाठ — समापन गुरपुरब की प्रातः।
नगर कीर्तन
पुष्प-छत्र तले गुरु ग्रंथ साहिब की यात्रा — शबद और सेवा सहित।
लंगर
सबके लिए खुला भोजन — दिन का जीवित हृदय; हाथ बँटाना ही सच्ची उपस्थिति।
श्रेष्ठ समय
प्रभातफेरियाँ भोर-पूर्व; दीवान-लंगर दिन-भर; रात्रि में दीपमाला।
सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।
जानने योग्य
स्वर्ण मंदिर का आज का दीप-प्रतिबिंब भारत की पहचान-छवियों में है।
नानक की चार उदासियाँ — महायात्राएँ — असम, लंका, तिब्बत और मक्का तक पहुँचीं।
गुरु ग्रंथ साहिब में उनकी वाणी कबीर, रविदास, फ़रीद के संग है — साथ गाता हुआ उपमहाद्वीप।
इस पर्व के मंत्र
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः
शांति मंत्र — त्रिविध शांति
जाप आरंभ करें →सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ॥
सर्वे भवन्तु सुखिनः
जाप आरंभ करें →गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः । गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥
गुरुर्ब्रह्मा — गुरु वन्दना
जाप आरंभ करें →