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Dharamkira
त्योहार पंचांग
अपने सरोवर में खड़ा स्वर्णमंडित हरमंदिर साहिब; जल पर उसका प्रतिबिंब फैला हुआ।
हरमंदिर साहिब — स्वर्ण मंदिर, अमृतसरबर्नार्ड गैनन, 2016

गुरु नानक देव जी

गुरु नानक जयंती

गुरपुरब — प्रथम गुरु का प्रकाश; प्रार्थना, प्रभातफेरी और खुले लंगर के साथ।

सिख परंपरा — सहोदर धर्म-पथ के रूप में सादर सम्मिलित।
मंगलवार, 24 नवंबर 2026रविवार, 14 नवंबर 2027

तिथि: कार्तिक पूर्णिमा

सबसे सरल शब्दों में

प्रकाश पर्व — गुरु नानक देव जी का जन्मदिन, जिनकी पहली सीख थी 'न कोई हिन्दू, न मुसलमान — एक ओंकार'। लंगर सबको एक समान खिलाता है।

कथा और उद्देश्य

1469 में तलवंडी — अब ननकाना साहिब — में जन्मे नानक नदी में तीन दिन अंतर्धान रहकर लौटे तो एक वाक्य से सब कुछ नया कर दिया: 'न कोई हिन्दू, न कोई मुसलमान।' जिन 'एक' को उन्होंने गाया — इक ओंकार — वे हर लेबल से परे सत्य हैं; उनका मार्ग: किरत करो, नाम जपो, वंड छको — श्रम, स्मरण, साझा।

गुरपुरब मनता है अखंड पाठ से — अड़तालीस घंटे अविराम गुरु ग्रंथ साहिब — भोर की प्रभातफेरियों, पंज प्यारों के पीछे नगर कीर्तन, और उस लंगर से जहाँ हर जाति-पंथ एक पंगत में बैठता है। कार्तिक पूर्णिमा हिन्दू-सिख को दीपों की एक साझी रात देती है।

क्या किया जाता है

अखंड पाठ

अड़तालीस घंटे का अविराम पाठ — समापन गुरपुरब की प्रातः।

नगर कीर्तन

पुष्प-छत्र तले गुरु ग्रंथ साहिब की यात्रा — शबद और सेवा सहित।

लंगर

सबके लिए खुला भोजन — दिन का जीवित हृदय; हाथ बँटाना ही सच्ची उपस्थिति।

श्रेष्ठ समय

प्रभातफेरियाँ भोर-पूर्व; दीवान-लंगर दिन-भर; रात्रि में दीपमाला।

सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।

जानने योग्य

  • स्वर्ण मंदिर का आज का दीप-प्रतिबिंब भारत की पहचान-छवियों में है।

  • नानक की चार उदासियाँ — महायात्राएँ — असम, लंका, तिब्बत और मक्का तक पहुँचीं।

  • गुरु ग्रंथ साहिब में उनकी वाणी कबीर, रविदास, फ़रीद के संग है — साथ गाता हुआ उपमहाद्वीप।

इस पर्व के मंत्र