सार्वभौम
गुरुर्ब्रह्मा — गुरु वन्दना
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः । गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥
सरल उच्चारण
Gu-rur brah-maa gu-rur vish-nuh, gu-rur de-vo ma-hesh-va-rah, gu-ruh saak-shaat pa-ra-brah-ma, tas-mai shree gu-ra-ve na-mah
Gurur brahmā gurur viṣṇuḥ gurur devo maheśvaraḥ, guruḥ sākṣāt parabrahma tasmai śrī-gurave namaḥ
इस मंत्र के विषय में
गुरु की सर्वाधिक प्रसिद्ध वन्दना — गुरु को सृष्टिकर्ता, पालक, संहारक और साक्षात् परब्रह्म रूप में नमन।
अर्थ
गुरु ही ब्रह्मा हैं, गुरु ही विष्णु, गुरु ही देव महेश्वर; गुरु साक्षात् परब्रह्म हैं — उन श्रीगुरु को नमस्कार। यह साहस जान-बूझकर है: सृष्टि, स्थिति, संहार — पूरा विश्व-प्रबंध — उस एक व्यक्ति में देखा गया, जो आपको समझाता है। क्योंकि शिष्य के लिए यही सत्य है: ब्रह्मांड में जो भी है, वह उसी द्वार से आता है जो गुरु खोलते हैं।
मंत्र कंठस्थ करें
पहली पंक्ति तब तक बोलें जब तक वह बिना पढ़े न आ जाए, फिर अगली पंक्ति जोड़कर दोनों बोलें, जब तक पूरा मंत्र अपने आप न आ जाए।
2 में से पंक्ति 1
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः ।
Gurur brahmā gurur viṣṇuḥ gurur devo maheśvaraḥ, guruḥ sākṣāt parabrahma tasmai śrī-gurave namaḥ
0अभी नहीं बोला
अगली पंक्ति से पहले ग्यारह बार का लक्ष्य रखें। जब पंक्ति बिना पढ़े आ जाए, तब आगे बढ़ें।
प्रगति केवल इसी डिवाइस पर रहती है।
कब जपें
किसी भी गुरु के पास अध्ययन से पहले, सब दिनों में गुरु पूर्णिमा को, और अपने शिक्षकों की स्मृति में मन-ही-मन पढ़ा जाता है; सत्संग और कक्षाएँ इसी से खुलती हैं।
शब्द-दर-शब्द
- गुरुर्ब्रह्माgurur brahmā
- गुरु ब्रह्मा हैं
- गुरुर्विष्णुःgurur viṣṇuḥ
- गुरु विष्णु हैं
- गुरुर्देवो महेश्वरःgurur devo maheśvaraḥ
- गुरु महेश्वर हैं
- साक्षात् परब्रह्मsākṣāt parabrahma
- साक्षात् परब्रह्म
- तस्मै श्रीगुरवे नमःtasmai śrī-gurave namaḥ
- उन श्रीगुरु को नमस्कार
स्रोत: गुरु गीता (स्कन्द पुराण परंपरा)
टिप्पणी: गुरु गीता और गुरु स्तोत्रम् में तीसरा चरण 'गुरुरेव परं ब्रह्म' है। यहाँ घरों और विद्यालयों में प्रचलित रूप 'गुरुः साक्षात् परब्रह्म' लिया गया है।

