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Dharamkira
त्योहार पंचांग
चित्र: चाँदनी में गंगा-तट पर घुटनों के बल बैठी एक स्त्री छोटा दीप जल में छोड़ती है; पीछे विश्राम करती गाय।
गंगा में दीप प्रवाहित करती स्त्रीविलियम सिम्पसन, 19th century

माँ गंगा

गंगा दशहरा

जिस दिन स्वर्ग की नदी ने धरती छूना स्वीकार किया।

रविवार, 13 जून 2027

तिथि: ज्येष्ठ शुक्ल दशमी

सबसे सरल शब्दों में

जिस दिन गंगा स्वर्ग से उतरीं — शिव की जटाओं से होकर, ताकि उनका वेग धरती को न तोड़े। हम स्नान करते हैं और उस नदी-माँ को धन्यवाद कहते हैं।

कथा और उद्देश्य

पितरों के उद्धार के लिए राजा भगीरथ ने पीढ़ियों जितनी तपस्या की, तब गंगा अवतरण को सहमत हुईं — और शिव ने उनकी प्रचंड धारा जटाओं में धारण की, ताकि धरती विदीर्ण न हो। ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को उन्होंने अंततः भूमि का स्पर्श किया।

यहाँ 'दशहरा' है दश-हरा — दस पापों का हरण। मान्यता है कि इस दिन गंगा-स्नान कर्म, वचन और विचार के दस दोष धो देता है। कथा स्मरण कराती है: जो प्रयत्न रुकना नहीं जानता, वह स्वर्ग से नदी भी उतार लाता है।

क्या किया जाता है

गंगा स्नान

गंगा में — या गंगा-स्मरण किए किसी भी जल में — धारा-सम्मुख स्नान।

दश-दान

दिन की संख्या से मेल खाता दान — दस फल, दस दीप, दस वस्त्र।

गंगा आरती

संध्या को नदी की आरती; घर पर जल-पात्र में उनके नाम का दीप।

श्रेष्ठ समय

स्नान भोर में; दीपदान-आरती गोधूलि में।

सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।

जानने योग्य

  • हर की पौड़ी का वर्ष के सबसे बड़े स्नानों में से एक आज ही होता है।

  • गंगाजल के न बिगड़ने का श्रेय कुछ अध्ययन जीवाणुभोजी (बैक्टीरियोफ़ेज) को देते हैं — मानो नदी अपने शोधक स्वयं साथ रखती हो।

  • काशी के घाटों से आज रात सहस्रों पत्तों की नाव-दीप धारा में उतरते हैं।

इस पर्व के मंत्र