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Dharamkira
त्योहार पंचांग
पीली धोती और रत्नजड़ित मुकुट में हरे परिदृश्य के बीच अपने मूषक पर सवार गणेश, हाथों में परशु और मोदक — 1910 का बाज़ार-चित्र।
मूषक पर गणेशबाज़ार-चित्र, 1910, 1910

गणेश

गणेश चतुर्थी

गणपति दस दिन के लिए घर आते हैं — स्थापना से विसर्जन तक।

स्थापना: सोमवार, 14 सितंबर 2026अनंत चतुर्दशी (विसर्जन): शुक्रवार, 25 सितंबर 2026स्थापना 2027: शनिवार, 4 सितंबर 2027अनंत चतुर्दशी 2027 (विसर्जन): मंगलवार, 14 सितंबर 2027

तिथि: भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी

सबसे सरल शब्दों में

गणेश जी घर आते हैं! दस दिनों तक मिट्टी के गणपति हमारे मेहमान — मोदक, आरती और बाजे — फिर जल में विसर्जन के साथ कहते हैं, 'अगले बरस तू जल्दी आ'।

कथा और उद्देश्य

पार्वती ने चंदन से द्वार-रक्षक बालक गढ़ा; प्रवेश से रोके गए शिव ने उसका शीश काटा — और गज-मस्तक देकर उसे पुनर्जीवित कर प्रथम-पूज्य बनाया। उनकी जन्म-तिथि उन्हें वर्ष के सबसे प्रिय अतिथि रूप में घर ले आती है।

1893 में तिलक ने महाराष्ट्र में इसे सार्वजनिक रूप दिया — घरेलू पूजा से दस दिनों का सामुदायिक उत्सव और संगीत।

दस दिन बाद विसर्जन मिट्टी को जल में लौटा देता है — आगमन, सम्मानित वास, विदा: भक्ति का पूरा चक्र, हर वर्ष दोहराया हुआ।

क्या किया जाता है

स्थापना-प्राणप्रतिष्ठा

शुभ मुहूर्त में मूर्ति-स्थापना और प्राणप्रतिष्ठा।

नित्य पूजा-मोदक

प्रातः-सायं आरती; 21 मोदक और दूर्वा — उनके प्रियतम अर्पण।

विसर्जन

डेढ़, तीन, पाँच, सात या दस दिन पर विदाई — गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस जल्दी आना।

श्रेष्ठ समय

स्थापना-पूजन मध्याह्न में — उनका जन्म-काल।

सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।

जानने योग्य

  • इस रात चंद्र-दर्शन वर्जित है — चंद्रमा ने कभी गणेश का उपहास किया था।

  • मुंबई के लालबागचा राजा के दर्शन में प्रतिदिन लाखों की पंक्तियाँ।

  • कच्ची मिट्टी और वनस्पति-रंगों की इको-मूर्तियाँ विसर्जन को उसका अर्थ लौटा रही हैं — बिना अवशेष घुल जाना ही विधि का भाव है।

इस पर्व के मंत्र