गणेश
गजाननं
गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम् । उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम् ॥
Gajānanaṁ bhūtagaṇādi-sevitaṁ kapittha-jambū-phala-cāru-bhakṣaṇam, umāsutaṁ śoka-vināśa-kārakaṁ namāmi vighneśvara-pāda-paṅkajam
सरल उच्चारण: Ga-jaa-na-nam bhoo-ta-ga-naa-di se-vi-tam, ka-pit-tha jam-boo pha-la chaa-ru bhak-sha-nam, u-maa-su-tam sho-ka vi-naa-sha kaa-ra-kam, na-maa-mi vigh-ne-shva-ra paa-da pan-ka-jam
इस मंत्र के विषय में
गजमुख प्रभु की प्रिय वन्दना — चार चरण, जो बताते हैं वे क्या हैं, क्या खाते हैं, किसके पुत्र हैं — और उनके चरणों पर समाप्त होते हैं।
अर्थ
मैं विघ्नेश्वर के चरण-कमलों में प्रणाम करता हूँ — गजमुख, भूतगणों से सेवित, कपित्थ-जम्बू फलों के रसिक, उमा के पुत्र, शोक के विनाशक। विशेषण आश्वासन के लिए चुने गए हैं: वे सहज प्रसन्न होते हैं — साधारण वन-फल ही उन्हें प्रिय हैं — और अत्यंत निकट हैं, स्वयं उमा की संतान। श्लोक कहता है: शोक बल से नहीं, उनकी स्मृत उपस्थिति से नष्ट होता है।
कब जपें
पूजाओं और सत्संगों के आरंभ में गाया जाता है — इसका छन्द समूह को साथ ले लेता है। पारिवारिक आयोजनों से पहले, और गणेशोत्सव के दिनों में जब गणपति घर विराजे हों, यह विशेष शोभा देता है।
शब्द-दर-शब्द
- गजाननंgajānanaṁ
- गजमुख
- भूतगणादिसेवितंbhūtagaṇādi-sevitaṁ
- भूतगणों से सेवित
- कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम्kapittha-jambū-phala-cāru-bhakṣaṇam
- कपित्थ और जामुन के फल रुचि से खाने वाले
- उमासुतंumāsutaṁ
- उमा (पार्वती) के पुत्र
- शोकविनाशकारकंśoka-vināśa-kārakaṁ
- शोक का नाश करने वाले
- नमामिnamāmi
- मैं प्रणाम करता हूँ
- विघ्नेश्वरपादपङ्कजम्vighneśvara-pāda-paṅkajam
- विघ्नेश्वर के चरण-कमलों में
स्रोत: पारंपरिक गणेश वन्दना

