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Dharamkira
त्योहार पंचांग
सिंहासन पर सीता सहित विराजमान राम, साथ में लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न, चरणों में हनुमान — राजा रवि वर्मा का लिथोग्राफ।
राम पंचायतनराजा रवि वर्मा, before 1906 (lithograph)

श्रीराम · दुर्गा

दशहरा · विजयादशमी

विजय की दशमी — रावण-दहन, देवी की विजय।

मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026शनिवार, 9 अक्टूबर 2027

तिथि: आश्विन शुक्ल दशमी

सबसे सरल शब्दों में

अच्छाई जीतती है! रावण के विशाल पुतले आतिशबाज़ी में जलते हैं क्योंकि आज ही राम ने उसे हराया — और दुर्गा ने महिषासुर को। बुराई बड़ी दिखती है, पर हारती है।

कथा और उद्देश्य

एक ही दिन दो विजयें: राम की रावण पर, दुर्गा की महिषासुर पर। उत्तर में रामलीला के समापन पर संध्या को पुतले जलते हैं; बंगाल में 'शुभो बिजॉय' के साथ देवी का विसर्जन होता है।

इस दिन का शांत विधान शमी-वृक्ष का है: अज्ञातवास के वर्ष पांडवों ने शस्त्र इसी पर छिपाए, और विजयादशमी को अर्जुन ने वापस लिए — अतः वृक्ष का धन्यवाद होता है, और उसके (महाराष्ट्र में आपटा के) पत्ते 'सोना' कहकर बाँटे जाते हैं। राजा आज ही सीमोल्लंघन करते थे — और वह रीति हर उस उद्यम में जीवित है जो आरंभ के लिए यही तिथि चुनता है।

क्या किया जाता है

रावण दहन

सूर्यास्त बाद रावण, कुंभकर्ण, मेघनाद के पुतलों का दहन।

शमी-अपराजिता पूजन

विजय मुहूर्त में शमी वृक्ष और अपराजिता देवी का पूजन।

आयुध पूजा · विद्यारंभम्

दक्षिण में महानवमी को उपकरण, वाद्य और पुस्तकों का पूजन (आयुध पूजा); केरल में विजयादशमी को बच्चों के प्रथम अक्षर (विद्यारंभम्)।

श्रेष्ठ समय

विजय मुहूर्त अपराह्न में — शुभारंभ का शास्त्रीय क्षण।

सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।

जानने योग्य

  • कुल्लू का दशहरा तब आरंभ होता है जब शेष का समापन — सप्ताह-भर देव-यात्राएँ।

  • यह तिथि इतनी शुभ मानी गई है कि नए कार्य हेतु पृथक् मुहूर्त नहीं देखा जाता।

  • बंगाल बिजया दशमी सिंदूर खेला से पूर्ण करता है — विसर्जन से पहले सुहागिनें देवी को और फिर एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं।

इस पर्व के मंत्र

टिप्पणी: कुछ पंचांग 2026 में 19 अक्टूबर लिखते हैं, जहाँ अपराह्न-व्यापिनी दशमी उस दिन है।