राम
आपदामपहर्तारं
आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम् । लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम् ॥
Āpadām apahartāraṁ dātāraṁ sarva-sampadām, lokābhirāmaṁ śrīrāmaṁ bhūyo bhūyo namāmy aham
सरल उच्चारण: Aa-pa-daam a-pa-har-taa-ram daa-taa-ram sar-va sam-pa-daam, lo-kaa-bhi-raa-mam shree-raa-mam bhoo-yo bhoo-yo na-maam-ya-ham
इस मंत्र के विषय में
राम रक्षा स्तोत्र के अंतिम भाग का श्लोक, जो अकेले भी पढ़ा जाता है — बारंबार प्रणाम, जो कवच बन जाता है; कठिन दिनों और लंबी यात्राओं में होंठों पर रहता है।
अर्थ
आपदाओं को हरने वाले, समस्त सम्पदाएँ देने वाले, लोकों के मन को रमाने वाले श्रीराम को मैं बारंबार प्रणाम करता हूँ। 'लोकाभिराम' श्लोक का शांत केन्द्र है: हर्ता और दाता होने से पहले वे वह हैं, जिन्हें देखकर ही लोक रम जाते हैं। और बारंबार प्रणाम — भूयो भूयो — वही है जो आनन्द शब्द चुक जाने पर करता है।
कब जपें
विपत्तियों का श्लोक — जब आपदा सामने हो या उसका भय, दिन के अंत में कृतज्ञता में, और हनुमान-उपासना के भीतर भी, जहाँ राम-नाम सदा प्रिय है।
शब्द-दर-शब्द
- आपदामपहर्तारंāpadām apahartāraṁ
- आपदाओं के हर्ता
- दातारं सर्वसम्पदाम्dātāraṁ sarva-sampadām
- समस्त सम्पदाओं के दाता
- लोकाभिरामंlokābhirāmaṁ
- लोकों के मन को रमाने वाले
- श्रीरामंśrīrāmaṁ
- श्रीराम को
- भूयो भूयो नमाम्यहम्bhūyo bhūyo namāmy aham
- मैं बारंबार प्रणाम करता हूँ
स्रोत: राम रक्षा स्तोत्र (बुध कौशिक) — इसके अंतिम श्लोकों में

