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Dharamkira
त्योहार पंचांग
बोधगया में उद्यानों और मन्नत-स्तूपों के ऊपर उठता महाबोधि मंदिर का ऊँचा ईंट-शिखर।
महाबोधि मंदिर, बोधगयारोहित शर्मा, 2023

गौतम बुद्ध

बुद्ध पूर्णिमा

एक पूर्णिमा, तीन जागरण — जन्म, बोधि और महापरिनिर्वाण।

बौद्ध परंपरा — अनेक हिन्दू घरों में भी पूज्य; कई परंपराएँ बुद्ध को विष्णु-अवतारों में गिनती हैं।
गुरुवार, 20 मई 2027

तिथि: वैशाख पूर्णिमा

सबसे सरल शब्दों में

बुद्ध पूर्णिमा — इसी उजली रात जन्म, बोध और महापरिनिर्वाण; करुणा के मध्यम मार्ग की शिक्षा।

कथा और उद्देश्य

परंपरा बुद्ध के जीवन के तीन निर्णायक क्षण एक ही वैशाख पूर्णिमा पर रखती है: लुम्बिनी के उपवन में जन्म, गया में बोधिवृक्ष तले बोधि, और कुशीनगर में महापरिनिर्वाण। विश्व जिसे 'वेसाक' कहता है, वह जागरण की ही पूर्णिमा है।

अनेक हिन्दू परिवारों के लिए यह दिन पंचांग में सहज बैठता है — भागवत पुराण (1.3.24) बुद्ध को अवतारों में गिनता है, और बौद्ध उन्हें करुणा और मध्यम मार्ग के शिक्षक के रूप में जानते हैं। व्रत, श्वेत वस्त्र और खीर — सुजाता की उस खीर की स्मृति, जो बोधि के द्वार पर अर्पित हुई थी।

क्या किया जाता है

स्नान और व्रत

पूर्णिमा-स्नान और सरल सात्त्विक व्रत।

दीपदान

बुद्ध-प्रतिमा या शांति की किसी भी वेदी पर दीप और श्वेत पुष्प।

खीर-दान

ज़रूरतमंदों में खीर — सुजाता का भाव अखंड।

मैत्री भावना

कुछ क्षण मैत्री-ध्यान — 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' का आंतरिक अभ्यास।

श्रेष्ठ समय

प्रातः स्नान-दान; ध्यान और दीप पूर्णिमा-संध्या में।

सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।

जानने योग्य

  • बोधगया का महाबोधि मंदिर — यूनेस्को धरोहर — यह रात्रि अखंड पाठ में बिताता है।

  • अनेक पंचांगों में वैशाख पूर्णिमा कूर्म जयंती भी है — विष्णु का कच्छप अवतार।

  • संयुक्त राष्ट्र 1999 से वेसाक अंतरराष्ट्रीय रूप से मनाता है।

इस पर्व के मंत्र