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Dharamkira
त्योहार पंचांग
वन-सरोवर में गुलाबी कमल पर खड़ी चतुर्भुज देवी लक्ष्मी, हाथों में कमल, साथ में श्वेत हाथी और हंस — राजा रवि वर्मा का चित्र।
लक्ष्मीराजा रवि वर्मा, c. 1896 (Ravi Varma Press print)

विष्णु · लक्ष्मी

अक्षय तृतीया

अक्षय तिथि — आज जो आरंभ या दान होता है, परंपरा कहती है, क्षय नहीं होता।

रविवार, 19 अप्रैल 20262027 (कुछ पंचांग: 9 मई): शनिवार, 8 मई 2027

तिथि: वैशाख शुक्ल तृतीया

सबसे सरल शब्दों में

वह दिन जिसका पुण्य कभी घटता नहीं — 'अक्षय' का अर्थ है कभी न खत्म होने वाला। लोग नए काम शुरू करते हैं, दान देते हैं, और लक्ष्मी जी का स्वागत करते हैं।

कथा और उद्देश्य

अक्षय अर्थात् जिसका क्षय न हो। इसी तिथि से त्रेता युग का आरंभ माना जाता है, परशुराम का जन्म हुआ, और सुदामा की मुट्ठी-भर पोहा कृष्ण के हाथों अक्षय संपदा बनी — यह देने से बढ़ने का दिन है।

मान्यता है कि इसी दिन व्यास ने महाभारत बोलना और गणेश ने लिखना आरंभ किया — अक्षय धन के जोड़ का अक्षय शब्द। स्वर्ण-क्रय की आधुनिक होड़ इस दिन के वास्तविक अर्थशास्त्र पर बाद की परत है: आज जो दिया जाता है वही बहुगुणित होता है; अक्षय फल का शास्त्रीय साधन सदा दान था।

क्या किया जाता है

दान

जल, अन्न, पंखे — ग्रीष्म में आवश्यकता वालों को दान: यही इस दिन का सच्चा 'क्रय' है।

लक्ष्मी-विष्णु पूजा

स्थायी, धर्मपूर्वक समृद्धि हेतु पूजन।

शुभारंभ

नए कार्य, बही के प्रथम लेख, और अक्षय के प्रतीक रूप में स्वर्ण।

श्रेष्ठ समय

पूरी तिथि स्वयं शुभ मानी गई है — पृथक् मुहूर्त की आवश्यकता नहीं।

सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।

जानने योग्य

  • बद्रीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के बाद प्रायः इसी के आसपास खुलते हैं।

  • वृंदावन के बांके बिहारी के चरण-दर्शन वर्ष में केवल इसी दिन होते हैं।

  • पुरी में रथयात्रा के रथों का निर्माण हर वर्ष इसी दिन आरम्भ होता है।

इस पर्व के मंत्र

टिप्पणी: कुछ 2026 पंचांग 20 अप्रैल लिखते हैं, क्योंकि तृतीया उस दिन सूर्योदय के बाद तक रहती है।