कोमल कूल्हे
तितली, उकड़ूँ, अश्व और झुकाव — धैर्यवान आकृतियाँ जो कूल्हों से कुर्सी उतार दें, कहीं कोई बल नहीं।
सबसे सरल शब्दों में
दिन भर बैठे रहने वाले हिस्से के लिए धीमे, आरामदेह खिंचाव: तितली-से फड़फड़ाओ, अलाव वाली उकड़ूँ बैठो, सिपाही-सा बड़ा नीचा कदम लो, फिर कोमलता से आगे झुको। कूल्हे धीरे-धीरे खुलना याद कर लेते हैं।
साथ-साथ अभ्यास करें
तीरों से अपनी गति पर मुद्राएँ बदलें, या चलाएँ दबाकर हर मुद्रा को स्वयं समय लेने दें। कीबोर्ड के तीर भी चलते हैं।
बद्ध कोणासन (तितली)
सहज साँस
तलवे मिले, पहले हल्की फड़फड़ाहट, फिर घुटनों को बस लटककर उतरने दें।
यह आसन सीखें →मुद्रा 1 / 6
यह क्या है
कूल्हे धकेलने से नहीं खुलते; ठहरने से खुलते हैं — और यह क्रम पूरा-का-पूरा ठहरने से बना है। तितली भीतरी रेखा गरमाती है, माला-उकड़ूँ मनुष्य की प्राचीनतम विश्राम-आकृति लौटाती है, नीचा अश्व कूल्हों के उस अग्र-भाग तक पहुँचता है जहाँ कुर्सियाँ सबसे गहरा काटती हैं, और लम्बा बैठा झुकाव परिपथ पूर्ण करता है। यही सुखद जप-बैठक की — और किसी दिन पद्मासन की — ईमानदार तैयारी है, एक भी बलपूर्वक मिनट के बिना।
स्रोत: इस पृष्ठ के शास्त्रीय आसनों से धरमकिरा द्वारा संकलित — यह क्रम है, शास्त्र नहीं।
आवृत्तियाँ और लय
एक बार, धीरे-धीरे; साप्ताहिक मैराथन से नित्य छोटी बैठकें बेहतर। घुटनों तले गद्दियाँ बुद्धिमानी हैं, दुर्बलता नहीं।
किसलिए किया जाता है
मेज़-बद्ध कूल्हे, सहज पालथी, और पद्मासन तक की लम्बी राह — करुणा से तय की हुई।
अभ्यास से पहले — स्वास्थ्य सर्वोपरि
यहाँ हर आकृति पर घुटनों का सुख शासन करता है — तितली में जाँघों को सहारा, उकड़ूँ में एड़ियाँ ऊँची, अश्व में पिछले घुटने तले गद्दी। जाँघ-मूल खिंचे तो दायरे छोटे; गर्भावस्था में उकड़ूँ सहारे से, झुकाव हल्के।
हर मुद्रा, क्रम से
बद्ध कोणासन (तितली)
सहज साँस
तलवे मिले, पहले हल्की फड़फड़ाहट, फिर घुटनों को बस लटककर उतरने दें।
मालासन
सहज साँस
गहरी उकड़ूँ में उतरें, एड़ियों तले कम्बल, हथेलियाँ हृदय पर।
नीचा अश्व — दायाँ पीछे
सहज साँस
दायाँ पैर दूर पीछे, घुटना गद्दी पर; कूल्हों को आगे उतरने दें, पाँच साँसें।
नीचा अश्व — बायाँ पीछे
सहज साँस
दिशा बदलें; वही धैर्यवान उतरना।
पश्चिमोत्तानासन
सहज साँस
टाँगें लम्बी, रीढ़ लम्बी, आगे झुक जाएँ — गहराई किसी की चिन्ता नहीं।
सुखासन — उपहार परखें
सहज साँस
पालथी में बैठकर देखें: बैठक अभी से पहले जितनी सरल हो चुकी है।