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Dharamkira

सम्पूर्ण योग

वृक्षासन

वृक्षासन — वृक्ष मुद्रा

वृक्ष = पेड़ — पेड़ की तरह जड़ जमाकर खड़े होना

एक पैर जड़ बनता है, हाथ ऊपर खिलते हैं — ऐसा संतुलन जो बढ़ता हुआ महसूस होता है।

मध्यमअवधि: हर ओर 5–8 साँसें; आरम्भ में दीवार के पास।

सबसे सरल शब्दों में

बगुले की तरह एक पैर पर खड़े हो जाओ, दूसरा पैर टाँग पर रखो (घुटने पर नहीं!), और बाँहों को डालियों की तरह ऊपर बढ़ाओ। एक जगह देखते रहो तो गिरोगे नहीं — पेड़ इधर-उधर नहीं देखते!

यह क्या है

वृक्षासन में एक पैर धरती में जड़ जमाता है, दूसरा खड़े पैर की भीतरी जाँघ या पिंडली पर टिकता है, और हथेलियाँ सिर के ऊपर शाखाओं के मुकुट-सी जुड़ती हैं। यहाँ संतुलन ठहराव नहीं, हज़ार नन्हे सुधार हैं — डगमगाते हुए भी शांत रहना ही अभ्यास है, इसीलिए गुरु इसे एक पैर पर ध्यान कहते हैं। दृष्टि (एक बिन्दु पर टिकी कोमल नज़र) ही पूरी कुंजी है।

अभ्यास से पहले — स्वास्थ्य सर्वोपरि

उठा हुआ पैर घुटने के जोड़ पर कभी न रखें। चक्कर, निम्न रक्तचाप या कमज़ोर टखनों में दीवार के सहारे करें और बाँहें ऊपर न तानें।

आसन में कैसे आएँ

  1. ताड़ासन में खड़े होकर सामने एक बिन्दु पर कोमल दृष्टि टिकाएँ।

  2. भार बाएँ पैर पर लें; दायाँ तलवा बाईं भीतरी जाँघ या पिंडली पर रखें — घुटने पर कभी नहीं।

  3. पैर और टाँग को हल्का एक-दूसरे में दबाएँ; कूल्हे समतल रहें।

  4. हथेलियाँ छाती पर जोड़ें, स्थिर हों तो सिर के ऊपर तानें।

  5. धीमी साँस के साथ ठहरें, फिर उतरकर दूसरी ओर दोहराएँ।

श्वास

धीमी और शांत; साँस सधते ही डगमगाहट भी सध जाती है।

किसलिए किया जाता है

संतुलन, टखनों-कूल्हों की शक्ति, और एकाग्र ध्यान।

इन क्रमों का अंग