उत्कटासन
उत्कटासन — कुर्सी मुद्रा
उत्कट = प्रचण्ड — प्रचण्ड बैठक
उस कुर्सी पर बैठिए जो है ही नहीं — जाँघें तपतीं, बाँहें आकाश की ओर।
सबसे सरल शब्दों में
अदृश्य कुर्सी पर बैठने का नाटक करो और आधे में ही रुक जाओ! घुटने मुड़े, कूल्हे पीछे, बाँहें ऊपर। टाँगें गरम और मज़बूत लगेंगी — यही उनका ताक़तवर बनना है।
यह क्या है
घुटने ऐसे मोड़िए मानो पीछे कुर्सी रखी हो, कूल्हे नीचे उतारिए, और बाँहें झुके धड़ की सीध में ऊपर तान दीजिए: उत्कटासन आपको 'बैठने की क्रिया' के ठीक बीच में थामे रखता है। जाँघें सेकंडों में सच्चा श्रम करने लगती हैं — यह आसन टाँगों के बल की भट्टी है — जबकि टेलबोन से उँगलियों तक की लम्बी रेखा पीठ को जाग्रत और छाती को उठाए रखती है। कुछ ग्रन्थ इसे सीधे 'शक्तिशाली आसन' कहते हैं — आठ साँस थामने वाला कोई भी इसकी पुष्टि कर देगा।
अभ्यास से पहले — स्वास्थ्य सर्वोपरि
घुटने की ताज़ा चोट में न करें; निम्न रक्तचाप में धीरे-धीरे उठें; गर्भावस्था में ठहराव छोटा और संतुलन हेतु पैर चौड़े। पंजे सदा घुटनों से आगे दिखते रहें।
आसन में कैसे आएँ
ताड़ासन में खड़े हों, पैर मिले या कूल्हों जितने खुले।
साँस छोड़ते हुए घुटने मोड़ें, कूल्हे पीछे-नीचे बैठाएँ — भार एड़ियों पर।
साँस लेते हुए बाँहें सिर के ऊपर, कानों की सीध में, हथेलियाँ आमने-सामने।
घुटने साथ और पंजों के पीछे रहें; कमर लम्बी, पसलियाँ कोमल।
ठहरें, फिर साँस लेते हुए खड़े हों और छोड़ते हुए बाँहें उतारें।
श्वास
सधी साँस ही इस आसन का ईंधन-मापक है — छोटी पड़ने लगे तो ऊपर आ जाएँ।
किसलिए किया जाता है
जाँघ, पिंडली, टखनों का बल; ठंडी सुबह झटपट उष्णता; और वह टाँग-बल जिस पर हर खड़ा आसन टिका है।