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Dharamkira

सम्पूर्ण योग

त्रिकोणासन

त्रिकोण = तीन कोण — त्रिभुजों में खिंचा शरीर

टाँगें चौड़ी, एक हाथ पिंडली पर, एक आकाश की ओर — ऐसी ज्यामिति जिसके भीतर साँस ली जाती है।

मध्यमअवधि: हर ओर 4–6 साँसें।

सबसे सरल शब्दों में

टाँगें चौड़ी करके खड़े हो जाओ, जैसे किसी दैत्य के कदम। झूले की तरह बगल में झुको, एक हाथ टाँग को छुए, और दूसरा हाथ आसमान की ओर तानो। अब तुम त्रिभुजों से बने हो!

यह क्या है

चौड़े कदमों में खड़े होकर धड़ अगली टाँग के ऊपर बगल की ओर झुकता है — एक हाथ पिंडली या टखने पर, दूसरा सीधा आकाश की ओर — और शरीर सुघड़ त्रिभुजों का समूह बन जाता है। न कुछ गोल होता है, न कुछ गिरता है: यह बगल की लम्बाई है, मानो दो काँच की परतों के बीच। यह कमर और जाँघ की पिछली नसें खींचता है, छाती चौड़ी खोलता है, और पूरे समय टाँगों से स्थिरता माँगता है।

अभ्यास से पहले — स्वास्थ्य सर्वोपरि

निम्न रक्तचाप या चक्कर में दृष्टि नीचे रखें और धीरे-धीरे उठें। गर्दन-दर्द में ऊपर नहीं, सामने देखें। अधिक खिंचने के बजाय हाथ को ईंट या कुर्सी पर टिकाएँ।

आसन में कैसे आएँ

  1. पैर एक टाँग जितने दूर रखें; दायाँ पंजा 90° बाहर, बायाँ थोड़ा भीतर।

  2. बाँहें कंधों की ऊँचाई पर फैलाएँ, हथेलियाँ नीचे।

  3. साँस छोड़ते हुए दाईं टाँग के ऊपर दूर तक बढ़ें, फिर दायाँ हाथ पिंडली या टखने पर रखें।

  4. बायाँ हाथ सीधा ऊपर तानें; गर्दन सहज हो तो दृष्टि उसी पर।

  5. दोनों टाँगें दृढ़, छाती खुली। ठहरें, फिर साँस लेते हुए उठकर दिशा बदलें।

श्वास

झुकाव में साँस छोड़ें; आकृति में सम साँस; उठते समय साँस लें।

किसलिए किया जाता है

बगल और जाँघ की नसों का खिंचाव, दृढ़ टाँगें, खुली छाती और पूरी साँस।

इन क्रमों का अंग