मत्स्यासन
मत्स्यासन — मछली मुद्रा
मत्स्य = मछली — विष्णु के प्रथम अवतार का नाम-दान
छाती आकाश की ओर तनी, शिखर हल्का टिका — कण्ठ और हृदय पूरे खुले।
सबसे सरल शब्दों में
पीठ के बल लेटो, छाती को छोटे गर्वीले पुल-सी ऊपर उठाओ, और सिर का ऊपरी हिस्सा पीछे धरती से हल्के छूने दो। तुम उछलती खुश मछली जैसे दिखोगे — और छाती को ताज़ी हवा का बड़ा-सा खिंचाव मिलेगा।
यह क्या है
पीठ के बल लेटकर छाती मेहराब में उठती है और सिर का शिखर पीछे हल्का टिकता है — देह छलाँग लेती मछली-सी मुड़ी हुई। नाम मत्स्य अवतार से, जिन्होंने प्रलय से वेद बचाए। यह सर्वांगासन का — और फ़ोन पर झुके हर घंटे का — शास्त्रीय प्रति-आसन है: कण्ठ खुलता है, अगली पसलियाँ फैलती हैं, और साँस वहाँ पहुँचती है जिसे दिन की मुद्रा ने बंद कर रखा था। गर्दन पर भार लगभग नहीं — मेहराब कोहनियाँ और अग्रबाहु उठाते हैं।
अभ्यास से पहले — स्वास्थ्य सर्वोपरि
गर्दन की चोट, अनियंत्रित रक्तचाप, माइग्रेन या चक्कर में न करें; गर्भावस्था में मेहराब नन्हा और कंधे गद्दी पर। शिखर धरती को केवल छूता है — सिर का भार कभी नहीं उठाता।
आसन में कैसे आएँ
पीठ के बल लेटें, टाँगें मिलीं; हथेलियाँ नीचे किए हाथ कूल्हों के नीचे सरकाएँ।
अग्रबाहु-कोहनियाँ दबाकर साँस लेते हुए छाती ऊँची उठाएँ।
सिर पीछे झुकने दें, शिखर हल्का टिके — भार कोहनियाँ ही उठाए रहें।
कण्ठ खोलें, पसलियाँ फैलाएँ, चौड़ी साँस लें।
बाहर आने को: कोहनियाँ दबाएँ, पहले सिर उठाएँ, फिर पीठ उतारें — शिखर पर लुढ़ककर कभी नहीं।
श्वास
यह आसन श्वास के लिए ही है — हर साँस खुली छाती को पूरा भरने दें।
किसलिए किया जाता है
छाती-कण्ठ का खुलना, फ़ोन-झुकाव का प्रतिकार, गहरी साँस; व्युत्क्रम आसनों का शास्त्रीय साथी।