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Dharamkira

सम्पूर्ण योग

मत्स्यासन

मत्स्यासन — मछली मुद्रा

मत्स्य = मछली — विष्णु के प्रथम अवतार का नाम-दान

छाती आकाश की ओर तनी, शिखर हल्का टिका — कण्ठ और हृदय पूरे खुले।

मध्यमअवधि: 3–6 साँसें, 1–2 आवृत्ति।

सबसे सरल शब्दों में

पीठ के बल लेटो, छाती को छोटे गर्वीले पुल-सी ऊपर उठाओ, और सिर का ऊपरी हिस्सा पीछे धरती से हल्के छूने दो। तुम उछलती खुश मछली जैसे दिखोगे — और छाती को ताज़ी हवा का बड़ा-सा खिंचाव मिलेगा।

यह क्या है

पीठ के बल लेटकर छाती मेहराब में उठती है और सिर का शिखर पीछे हल्का टिकता है — देह छलाँग लेती मछली-सी मुड़ी हुई। नाम मत्स्य अवतार से, जिन्होंने प्रलय से वेद बचाए। यह सर्वांगासन का — और फ़ोन पर झुके हर घंटे का — शास्त्रीय प्रति-आसन है: कण्ठ खुलता है, अगली पसलियाँ फैलती हैं, और साँस वहाँ पहुँचती है जिसे दिन की मुद्रा ने बंद कर रखा था। गर्दन पर भार लगभग नहीं — मेहराब कोहनियाँ और अग्रबाहु उठाते हैं।

अभ्यास से पहले — स्वास्थ्य सर्वोपरि

गर्दन की चोट, अनियंत्रित रक्तचाप, माइग्रेन या चक्कर में न करें; गर्भावस्था में मेहराब नन्हा और कंधे गद्दी पर। शिखर धरती को केवल छूता है — सिर का भार कभी नहीं उठाता।

आसन में कैसे आएँ

  1. पीठ के बल लेटें, टाँगें मिलीं; हथेलियाँ नीचे किए हाथ कूल्हों के नीचे सरकाएँ।

  2. अग्रबाहु-कोहनियाँ दबाकर साँस लेते हुए छाती ऊँची उठाएँ।

  3. सिर पीछे झुकने दें, शिखर हल्का टिके — भार कोहनियाँ ही उठाए रहें।

  4. कण्ठ खोलें, पसलियाँ फैलाएँ, चौड़ी साँस लें।

  5. बाहर आने को: कोहनियाँ दबाएँ, पहले सिर उठाएँ, फिर पीठ उतारें — शिखर पर लुढ़ककर कभी नहीं।

श्वास

यह आसन श्वास के लिए ही है — हर साँस खुली छाती को पूरा भरने दें।

किसलिए किया जाता है

छाती-कण्ठ का खुलना, फ़ोन-झुकाव का प्रतिकार, गहरी साँस; व्युत्क्रम आसनों का शास्त्रीय साथी।

इन क्रमों का अंग