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Dharamkira
त्योहार पंचांग
सिंहासन पर सीता सहित विराजमान राम, साथ में लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न, चरणों में हनुमान — राजा रवि वर्मा का लिथोग्राफ।
राम पंचायतनराजा रवि वर्मा, before 1906 (lithograph)

महर्षि वाल्मीकि

वाल्मीकि जयंती

आदिकवि का दिवस — जिन्हें करुणा ने कवि बनाया, और जिन्होंने रामायण रची।

सोमवार, 26 अक्टूबर 2026शुक्रवार, 15 अक्टूबर 2027

तिथि: आश्विन पूर्णिमा

सबसे सरल शब्दों में

आदिकवि का जन्मदिन — वह वनवासी जो ऋषि बना और रामायण रची — प्रमाण कि बदलने के लिए कोई भी बहुत दूर नहीं जा चुका होता।

कथा और उद्देश्य

ऋषि होने से पहले, परंपरा कहती है, वे रत्नाकर नामक वनवासी लुटेरे थे — नारद से भेंट ने अंतर्मुख किया, और वर्षों की स्थिरता में उन पर वल्मीक (बाँबी) उग आया। संस्कृत काव्य का प्रथम श्लोक उनसे शोक-शाप बनकर फूटा: क्रौंच-युगल में से एक को व्याध द्वारा मारा देख, दुःख ही छंद बन गया — 'मा निषाद...'

उसी छंद से रामायण जन्मी — चौबीस सहस्र श्लोक, जिनमें कवि स्वयं सीता को आश्रय देते हैं और लव-कुश को उनके पिता की कथा गाना सिखाते हैं। आश्विन पूर्णिमा की उनकी जयंती शोभायात्राओं और पाठ से मनती है — सर्वाधिक उन समाजों में जो उनका नाम गर्व से धारण करते हैं।

क्या किया जाता है

रामायण पाठ

कोई भी कांड — सुंदरकांड सर्वप्रिय।

शोभायात्रा

आदिकवि की झाँकी और राम-नाम संकीर्तन सहित यात्राएँ।

अन्न-दान

उनके नाम अन्न-सेवा — जो पथ से लौटे और स्वयं आश्रय बन गए।

श्रेष्ठ समय

पाठ और यात्राएँ पूर्णिमा-दिवस भर।

सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।

जानने योग्य

  • पंजाब में यह 'प्रगट दिवस' है, जहाँ भगवान वाल्मीकि के अपने मंदिर हैं।

  • क्रौंच-श्लोक संस्कृत का प्रथम श्लोक माना जाता है — काव्य का जन्म-पत्र करुणा है।

  • बिठूर का उनका आश्रम लव-कुश की जन्मस्थली माना जाता है।

इस पर्व के मंत्र