
महर्षि वाल्मीकि
वाल्मीकि जयंती
आदिकवि का दिवस — जिन्हें करुणा ने कवि बनाया, और जिन्होंने रामायण रची।
तिथि: आश्विन पूर्णिमा
सबसे सरल शब्दों में
आदिकवि का जन्मदिन — वह वनवासी जो ऋषि बना और रामायण रची — प्रमाण कि बदलने के लिए कोई भी बहुत दूर नहीं जा चुका होता।
कथा और उद्देश्य
ऋषि होने से पहले, परंपरा कहती है, वे रत्नाकर नामक वनवासी लुटेरे थे — नारद से भेंट ने अंतर्मुख किया, और वर्षों की स्थिरता में उन पर वल्मीक (बाँबी) उग आया। संस्कृत काव्य का प्रथम श्लोक उनसे शोक-शाप बनकर फूटा: क्रौंच-युगल में से एक को व्याध द्वारा मारा देख, दुःख ही छंद बन गया — 'मा निषाद...'
उसी छंद से रामायण जन्मी — चौबीस सहस्र श्लोक, जिनमें कवि स्वयं सीता को आश्रय देते हैं और लव-कुश को उनके पिता की कथा गाना सिखाते हैं। आश्विन पूर्णिमा की उनकी जयंती शोभायात्राओं और पाठ से मनती है — सर्वाधिक उन समाजों में जो उनका नाम गर्व से धारण करते हैं।
क्या किया जाता है
रामायण पाठ
कोई भी कांड — सुंदरकांड सर्वप्रिय।
शोभायात्रा
आदिकवि की झाँकी और राम-नाम संकीर्तन सहित यात्राएँ।
अन्न-दान
उनके नाम अन्न-सेवा — जो पथ से लौटे और स्वयं आश्रय बन गए।
श्रेष्ठ समय
पाठ और यात्राएँ पूर्णिमा-दिवस भर।
सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।
जानने योग्य
पंजाब में यह 'प्रगट दिवस' है, जहाँ भगवान वाल्मीकि के अपने मंदिर हैं।
क्रौंच-श्लोक संस्कृत का प्रथम श्लोक माना जाता है — काव्य का जन्म-पत्र करुणा है।
बिठूर का उनका आश्रम लव-कुश की जन्मस्थली माना जाता है।