
ब्रह्मा · नववर्ष
उगादि · गुड़ी पड़वा
दक्षिण का चांद्र नववर्ष — नीम-गुड़, गुड़ी ध्वज और नए आरंभ।
तिथि: चैत्र शुक्ल प्रतिपदा
सबसे सरल शब्दों में
आंध्र, तेलंगाना, कर्नाटक और महाराष्ट्र का नववर्ष। घर विजय-ध्वज (गुड़ी) सजाते हैं, छह स्वादों वाली खास चटनी खाते हैं, और साल की नई शुरुआत करते हैं।
कथा और उद्देश्य
परंपरा में इसी प्रतिपदा को ब्रह्मा ने सृष्टि का आरंभ किया। तेलुगु-कन्नड़ प्रदेश इसे उगादि कहते हैं; महाराष्ट्र द्वारों पर गुड़ी — दंड पर वस्त्र और कलश — विजय और स्वागत की ध्वजा रूप में चढ़ाता है।
उगादि पचड़ी एक ही पात्र में छह रस मिलाती है — मीठा, खट्टा, नमकीन, कड़वा, तीखा, कसैला — आने वाले वर्ष का सच्चा स्वाद।
क्या किया जाता है
अभ्यंग स्नान
सूर्योदय से पूर्व तेल-स्नान; नए वस्त्र।
गुड़ी / पचड़ी
गुड़ी चढ़ाना; छह रसों की पचड़ी; नीम-गुड़ ग्रहण।
पंचांग श्रवण
नववर्ष के पंचांग का श्रवण — वर्ष-फल की पारंपरिक सुनवाई।
श्रेष्ठ समय
गुड़ी सूर्योदय पर चढ़ती और संध्या से पहले उतरती है; पूजा प्रातः।
सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।
जानने योग्य
इसी दिन उत्तर में चैत्र नवरात्रि आरंभ होती है — एक तिथि, अनेक नववर्ष।
कश्मीर का नवरेह और सिंधी चेटी चंड इसी आरंभ-ऋतु के पर्व हैं।
'उगादि' अर्थात् 'युगादि' — युग का आरंभ — और हर उगादि तेलुगु-कन्नड़ वर्ष साठ-वर्षीय संवत्सर-चक्र से नया नाम पाता है।