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Dharamkira
त्योहार पंचांग
सिंह पर सवार, अनेक भुजाओं में शस्त्र लिए महिषासुर का वध करती देवी दुर्गा — रवि वर्मा प्रेस का चित्र।
दुर्गा महिषासुरमर्दिनीरवि वर्मा प्रेस, c. 1910

शीतला माता

शीतला अष्टमी (बसोड़ा)

शीतलता की देवी — जिस दिन चूल्हा विश्राम करता है और बासी भोजन प्रसाद होता है।

उत्तर और पश्चिम भारत
मंगलवार, 30 मार्च 2027

तिथि: चैत्र कृष्ण अष्टमी (उत्तर) · फाल्गुन कृष्ण अष्टमी (पश्चिम-दक्षिण)रात वही है

आप कौन-सा पंचांग मानते हैं?

शुक्ल पक्ष का नाम हर जगह एक ही है। कृष्ण पक्ष उत्तर में एक मास का होता है और महाराष्ट्र, गुजरात व दक्षिण में उससे पिछले मास का — रात वही, नाम दो, और दोनों सही। चुनाव केवल इसी उपकरण पर रहता है।

सबसे सरल शब्दों में

एक दिन जब चूल्हा विश्राम करता है — शीतला माता के लिए हम कल का बना, ठंडा भोजन खाते हैं; वे देवी जो बुखार और फोड़े-फुंसी दूर रखती हैं।

कथा और उद्देश्य

शीतला — 'जो शीतल करे' — वह माता हैं जो ज्वर, चेचक और ग्रीष्म की तपन से रक्षा करती हैं। बसोड़ा के दिन आग नहीं जलती: पूर्व संध्या का पका भोजन देवी को अर्पित होता है और पूरा परिवार वही ग्रहण करता है — वर्ष का एक दिन जब 'बासी' पवित्र है।

स्कंद पुराण का शीतलाष्टकम् उन्हें गर्दभ पर, हाथ में मार्जनी (झाड़ू) और शीतल जल-कलश लिए चित्रित करता है — स्वच्छता, चूल्हे की अग्नि के विश्राम और ऋतु-परिवर्तन में देह के प्रति कोमलता का लोक-विवेक।

क्या किया जाता है

बसोड़ा भोजन

मीठे चावल, राबड़ी, पूआ आदि पूर्व संध्या को पकते हैं; पर्व के दिन कुछ नहीं पकता।

शीतला पूजा

प्रातः देवी के थान या घर की वेदी पर ठंडा भोजन, जल, दही, हल्दी अर्पित।

जल-दान

गर्माती ऋतु में शीतल जल और छाछ का वितरण — देवी की पूजा का व्यवहार-रूप।

देवी जाप

ॐ दुं दुर्गायै नमः या नवार्ण मंत्र — 21 या 108 बार।

श्रेष्ठ समय

पूजा प्रातः की शीतलता में — दिन तपने से पूर्व।

सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।

जानने योग्य

  • गुजरात में श्रावण की 'शीतला सातम' अलग है — देवी वही, ऋतु भिन्न।

  • शीतला की मार्जनी और सूप सबसे पुरानी जन-स्वास्थ्य शिक्षा कहते हैं: स्वच्छता ही पूजा है।

  • अनेक गाँवों में वे ग्रीष्म के रोगों में बच्चों की रक्षक माता हैं।

इस पर्व के मंत्र