
रक्षा-सूत्र · परिवार
रक्षाबंधन
बहन-भाई के बीच बँधा रक्षा का सूत्र।
तिथि: श्रावण पूर्णिमा
सबसे सरल शब्दों में
बहन भाई की कलाई पर धागा बाँधती है — राखी। धागा नन्हा है; उसके भीतर का वचन ('मैं तेरी रक्षा करूँगा') बहुत बड़ा।
कथा और उद्देश्य
राखी किसी एक कथा से बड़ी है: युद्ध से पहले इंद्राणी ने इंद्र को बाँधी; द्रौपदी की साड़ी की चीर ने कृष्ण को सदा के लिए उसकी रक्षा से बाँध दिया। एक धागा, एक तिलक, एक मिठाई — और नवीनीकृत वचन।
यही पूर्णिमा एक प्राचीनतर परत भी रखती है: श्रावणी उपाकर्म — यज्ञोपवीत का नवीनीकरण और अध्ययन का पुनरारंभ; रक्षा और विद्या एक ही कलाई पर। और 1905 में रवीन्द्रनाथ ने इस सूत्र को इतिहास बना दिया: बंग-भंग के विरुद्ध हिन्दू-मुसलमानों ने एक-दूसरे को राखियाँ बाँधीं — प्रमाण कि यह नन्हा धागा बहुत बड़ी चीज़ें बाँधे रख सकता है।
क्या किया जाता है
राखी और तिलक
बहन तिलक-अक्षत-आरती संग राखी बाँधती है; भाई रक्षा का वचन और उपहार देता है।
रक्षा मंत्र
राखी बाँधते हुए 'येन बद्धो बली राजा…' श्लोक बोला जाता है — वह रक्षा जिसने कभी राजा बलि को बाँधा था, इस कलाई पर अटल रहने की प्रार्थना।
श्रेष्ठ समय
अपराह्न श्रेष्ठ; भद्रा काल में राखी नहीं बाँधी जाती।
सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।
जानने योग्य
तटीय भारत इसी दिन समुद्र को नारियल अर्पित करता है — नारळी पूर्णिमा।
उत्तर के कुछ अंचलों में यही कजरी पूर्णिमा भी है।
वृंदावन और बंगाल में यही पूर्णिमा झूलन यात्रा का समापन है — वर्षा ऋतु का राधा-कृष्ण झूला-उत्सव।
इस पर्व के मंत्र
टिप्पणी: पूर्णिमा-विस्तार और भद्रा के कारण 2026 के स्रोत 27/28 अगस्त में विभाजित हैं; अपराह्न-व्यापिनी तिथि 28 अगस्त है।