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रक्षा-सूत्र मंत्र (राखी मंत्र)

येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः । तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल ॥

Yena baddho balī rājā dānavendro mahābalaḥ, tena tvām abhibadhnāmi rakṣe mā cala mā cala

सरल उच्चारण: ye-na bad-dho ba-lee raa-jaa daa-na-ven-dro ma-haa-ba-lah, te-na tvaam a-bhi-badh-naa-mi rak-she maa cha-la maa cha-la

रक्षा

इस मंत्र के विषय में

राखी या रक्षा-सूत्र बाँधते समय बोला जाने वाला श्लोक — जिस रक्षा ने महाबली बलि को बाँधा, वही सामने की कलाई पर आवाहित होती है।

अर्थ

जिससे दानवेन्द्र महाबली राजा बलि बाँधे गए, उसी से मैं तुम्हें बाँधता/बाँधती हूँ। हे रक्षे! विचलित मत हो, मत हो। स्मरण उसी बंधन का है, जो वामन ने बलि को बाँधा: वह बंधन जिसे महाबली राजा ने स्वीकारा — और उसी से ऊँचे उठे। कलाई पर बँधा सूत्र वही दाँव दोहराता है — यहाँ रक्षा बेड़ी नहीं, निभाया हुआ वचन है; प्रार्थना सहित कि वह डिगे नहीं।

कब जपें

जब सूत्र कलाई की परिक्रमा करता है, तब कहा जाता है — रक्षाबंधन पर राखी बाँधते हुए, और पूजाओं में जब पुरोहित रक्षा-सूत्र बाँधते हैं।

शब्द-दर-शब्द

येन बद्धो बली राजाyena baddho balī rājā
जिससे बली राजा बलि बँधे
दानवेन्द्रो महाबलःdānavendro mahābalaḥ
महाबली दानवेन्द्र
तेन त्वामभिबध्नामिtena tvām abhibadhnāmi
उसी से मैं तुम्हें बाँधता हूँ
रक्षे मा चल मा चलrakṣe mā cala mā cala
हे रक्षा — विचलित न हो, न हो

स्रोत: पारंपरिक रक्षा-सूत्र श्लोक (बलि-वामन कथा)

येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः । तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल ॥

Yena baddho balī rājā dānavendro mahābalaḥ, tena tvām abhibadhnāmi rakṣe mā cala mā cala

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