
गणेश और कुलदेवता
पुत्तांडु
तमिल नववर्ष — स्वर्ण, दर्पण और आम की थाली का प्रथम-प्रकाश दर्शन।
तिथि: चित्तिरै 1 — तमिल सौर नववर्ष।
सबसे सरल शब्दों में
तमिल नववर्ष — भोर में सबसे पहले सोना, फल और दर्पण की थाली के दर्शन, नए वस्त्र, और पंचांग-पाठ के साथ नई शुरुआत।
कथा और उद्देश्य
पुत्तांडु — 'नया वर्ष' — चित्तिरै मास खोलता है। केरल की कणि की तरह तमिल घरों में पूर्व रात्रि 'कण्णि' थाली सजती है: स्वर्ण, ताम्बूल, दर्पण, फल, पुष्प — जागते ही प्रथम दर्शन, ताकि वर्ष पूर्णता से आरंभ हो।
भोजन में 'मांगा पचड़ी' होती है — कच्चा आम, गुड़, नीम के फूल, मिर्च, नमक, इमली एक साथ: मीठा, कड़वा, तीखा, नमकीन, खट्टा, और आम का अपना कसैलापन — छह रस एक ही व्यंजन में। नववर्ष को समूचा चखा जाता है — और समूचा ही अपनाया जाता है।
क्या किया जाता है
कण्णि दर्शन
प्रथम प्रकाश में मंगल-थाली के दर्शन; फिर स्नान और नए वस्त्र।
पंचांग-पठन
मंदिर में या घर के बड़ों द्वारा नववर्ष-पंचांग का वाचन।
मांगा पचड़ी
षड्-रस व्यंजन पहले देव को, फिर सबको।
गणेश वंदना
वर्ष के प्रथम कार्यों से पहले ॐ गं गणपतये नमः।
श्रेष्ठ समय
कण्णि भोर में; पंचांग-वाचन प्रातः।
सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।
जानने योग्य
'पुत्तांडु वाऴ्त्तुकळ्!' — इस दिन की शुभकामना।
मदुरै का चित्तिरै महोत्सव — मीनाक्षी का दिव्य विवाह — इसी मास में भरता है।
श्रीलंका के तमिल और सिंहल समाज यही सौर दिवस 'अलुत् अवुरुद्द' रूप में मनाते हैं।