
महाबलि · वामन (विष्णु)
ओणम
केरल का फसल-पर्व — प्रिय राजा महाबलि एक दिन के लिए अपनी प्रजा से मिलने आते हैं।
तिथि: चिंगम मास का तिरुवोणम नक्षत्र (मलयालम पंचांग)
सबसे सरल शब्दों में
केरल का फ़सल-उत्सव: फूलों की रंगोली, नौका-दौड़ और भव्य भोज — सब अच्छे राजा महाबलि के स्वागत में, जो साल में एक बार अपनी प्रजा से मिलने आते हैं।
कथा और उद्देश्य
महाबलि का राज्य इतना न्यायपूर्ण था कि देवता चिंतित हो उठे; विष्णु वामन रूप में आए और तीन पग भूमि माँगी। दो पगों में लोक नप गए — तीसरे के लिए बलि ने अपना शीश दे दिया, और स्वामित्व खोकर विनम्रता से सब जीत लिया। ओणम उनके वार्षिक आगमन का वचन है।
दस दिन केरल पूक्कलम (पुष्प-रंगोली) सजाता है, सर्पनौका दौड़ें होती हैं, और ओणसद्या में हर पंथ एक ही केले के पत्ते पर साथ बैठता है।
क्या किया जाता है
पूक्कलम
आँगन में दस दिन घेरे-दर-घेरे बढ़ती पुष्प-रंगोली।
ओणसद्या
केले के पत्ते पर 20+ व्यंजनों का शाकाहारी महाभोज।
वामन-महाबलि पूजन
घर में मिट्टी के त्रिक्काकरा अप्पन का पूजन।
श्रेष्ठ समय
तिरुवोणम मुख्य दिवस है; सद्या मध्याह्न का भोज है।
सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।
जानने योग्य
वल्लम कलि (सर्पनौका दौड़) में एक नौका पर सौ से अधिक नाविक होते हैं।
ओणम केरल का राजकीय पर्व है — सभी समुदाय साथ मनाते हैं।
कोच्चि के पास त्रिक्काकरा — वामन का अपना मन्दिर — इस पर्व का पारम्परिक घर है; अथम से तिरुवोणम तक उसका दस-दिवसीय उत्सव ही ओणम का पंचांग तय करता है।