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Dharamkira
त्योहार पंचांग
स्वर्णिम धोती में बाँसुरी बजाते कृष्ण और पास खड़ी राधा, पीछे दो श्वेत गायें और महल के स्तंभ — 1897 का क्रोमोलिथोग्राफ।
राधा को बाँसुरी सुनाते कृष्णअज्ञात प्रेस, क्रोमोलिथोग्राफ, 1897

जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा

जगन्नाथ रथ यात्रा

जगत के नाथ मंदिर छोड़कर मार्ग पर सबसे मिलने निकलते हैं।

पुरी, ओडिशा — और समस्त विश्व
रथ यात्रा: सोमवार, 5 जुलाई 2027बहुड़ा यात्रा (वापसी): मंगलवार, 13 जुलाई 2027

तिथि: आषाढ़ शुक्ल द्वितीया

सबसे सरल शब्दों में

पुरी में जगन्नाथ की विशाल रथ-यात्रा — वह दिन जब प्रभु स्वयं मंदिर से निकलकर सड़क पर सबसे मिलते हैं — न द्वार, न कतार।

कथा और उद्देश्य

वर्ष में एक बार जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा सहित, तीन गगनचुंबी रथों पर पुरी मंदिर से तीन किलोमीटर दूर गुंडिचा — मौसी के घर — पधारते हैं। मार्ग पर न गर्भगृह है, न कोई रोक: हर आँख दर्शन कर सकती है, हर हाथ रस्सी छू सकता है — और रथ खींचना महायज्ञ-तुल्य माना गया है।

पहिये चलने से पूर्व पुरी के गजपति महाराज स्वर्ण-दंड की बुहारी से रथों का प्रमार्जन करते हैं — छेरा पहँरा: जगन्नाथ के आगे राजा भी सेवक है। सप्ताह-भर के प्रवास के बाद बहुड़ा यात्रा — वापसी — होती है, और मौसी के द्वार पर पोड़ा-पीठा का विराम किसी भी भानजे जैसा।

क्या किया जाता है

रथ-कर्षण

नंदीघोष, तालध्वज, दर्पदलन — किसी भी रथ की रस्सी प्रभु-नाम के साथ एक बार भी खींचना।

पथ-दर्शन

यात्रा सबके लिए दर्शन है — प्रभु उन तक आते हैं जो उन तक न आ सके।

घर का उत्सव

पुरी से दूर: जगन्नाथ-चित्र का शृंगार, खिचड़ी-भोग, 'जय जगन्नाथ' संकीर्तन।

श्रेष्ठ समय

छेरा पहँरा के बाद अपराह्न में रथ चलते हैं; कर्षण गोधूलि तक।

सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।

जानने योग्य

  • अंग्रेज़ी शब्द 'जगरनॉट' इन्हीं अजेय रथों के औपनिवेशिक विस्मय से बना।

  • तीनों विग्रह नीम-काष्ठ के हैं — नबकलेबर में लगभग हर 12–19 वर्ष पर नवनिर्मित।

  • इस्कॉन अब सैकड़ों नगरों में रथयात्रा करता है — पुरी का मार्ग विश्व-भर घूमता है।

इस पर्व के मंत्र