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Dharamkira
त्योहार पंचांग
चित्र: चाँदनी में गंगा-तट पर घुटनों के बल बैठी एक स्त्री छोटा दीप जल में छोड़ती है; पीछे विश्राम करती गाय।
गंगा में दीप प्रवाहित करती स्त्रीविलियम सिम्पसन, 19th century

व्यास · अपने गुरु

गुरु पूर्णिमा

हर गुरु के प्रति कृतज्ञता की पूर्णिमा — महर्षि व्यास से आरंभ।

बुधवार, 29 जुलाई 2026रविवार, 18 जुलाई 2027

तिथि: आषाढ़ पूर्णिमा

सबसे सरल शब्दों में

गुरुओं को धन्यवाद कहने की पूर्णिमा — स्कूल के शिक्षक, माता-पिता, और हर वह व्यक्ति जिसने आपके भीतर ज्ञान का दीया जलाया।

कथा और उद्देश्य

आषाढ़ पूर्णिमा वेदव्यास का दिन है — जिन्होंने वेदों का संपादन किया और महाभारत दिया — और उनके द्वारा गुरु-परंपरा की अखंड धारा का। जिसने भी आपके जीवन में प्रकाश पहुँचाया, आज उसका पूजन है।

एक आधुनिक योग-कथन — जिसे ईशा फ़ाउंडेशन ने लोकप्रिय किया — इसी चाँद को और पीछे तक पढ़ता है: इसी पर आदियोगी शिव दक्षिणाभिमुख हुए और सप्तर्षियों को शिक्षा देने लगे — प्रथम गुरु, प्रथम कक्षा। और यह सम्मान केवल अतीत का नहीं: आज जीवित गुरुओं को भी प्रणाम है — प्राध्यापक, प्रशिक्षक, पहला श्लोक सिखाने वाली दादी — क्योंकि व्यास-पीठ वहीं है जहाँ कोई प्रकाश आगे सौंपता है।

क्या किया जाता है

गुरु पूजन

गुरु, बड़ों और प्रथम शिक्षकों का पूजन — माता-पिता सहित।

व्यास स्मरण

व्यास-प्रदत्त ग्रंथों का पाठ; 'गुरुर्ब्रह्मा' श्लोक।

चातुर्मास आरंभ

संन्यासी वर्षा के चार मास एक स्थान पर — अध्ययन-सत्र आरंभ।

श्रेष्ठ समय

पूर्णिमा के प्रातः पूजन; दिन-भर सत्संग।

सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।

जानने योग्य

  • बौद्ध परंपरा इसी पूर्णिमा को सारनाथ के प्रथम धर्मोपदेश का दिन मानती है।

  • 'गुरु' की व्याख्या — गु (अंधकार), रु (हरने वाला): अंधकार का हर्ता।

  • इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं — अनेक साधक वर्ष का ग्रंथ-स्वाध्याय आज ही आरंभ करते हैं।

इस पर्व के मंत्र