अन्य देव
गुरु नाम-मंत्र
ॐ श्री गुरवे नमः
Oṁ Śrī Gurave Namaḥ
सरल उच्चारण: Om shree gu-ra-ve na-mah
इस मंत्र के विषय में
गुरु को संक्षिप्त प्रणाम — गुरु जो भी हों, जहाँ भी हों। यह जीवन-भर का लेखा ईमानदार रखता है: जो भी हम जानते हैं, वह किसी सौंपने वाले हाथ के बिना नहीं आया।
अर्थ
ॐ, श्री गुरु को प्रणाम। गुरु गीता कहती है — 'गु' अंधकार है, 'रु' उसका निवारण: गुरु का पूरा पद दो अक्षरों में व्युत्पन्न। मंत्र जान-बूझकर किसी का नाम नहीं लेता: प्रणाम उसे है, जो भी आपके लिए उस पद पर खड़ा रहा — और उन सबके ऊपर के तत्त्व को: कि मन का दीप सदा किसी और दीप से ही जला है।
कब जपें
गुरु पूर्णिमा और गुरुवार; अध्ययन से पहले और अध्यापन से पहले, और हर उस व्यक्ति की स्मृति में जिसने अंधकार हटाया — माता-पिता और मार्गदर्शक भी।
शब्द-दर-शब्द
- ॐoṁ
- प्रणव, आदि नाद
- श्री गुरवेśrī gurave
- श्री गुरु के लिए
- नमःnamaḥ
- प्रणाम, नमन
स्रोत: पारंपरिक नाम-मंत्र (गुरु-परंपरा)