
कृष्ण · गोवर्धन
गोवर्धन पूजा · अन्नकूट
कृष्ण द्वारा उठाया गिरिराज — और कृतज्ञता में अन्न का पर्वत।
तिथि: कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा
सबसे सरल शब्दों में
दिवाली के अगले दिन अन्न का छोटा पर्वत सजता है — क्योंकि बाल कृष्ण ने पूरे गाँव को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत छाते-सा उठा लिया था।
कथा और उद्देश्य
इंद्र की प्रलयंकारी वर्षा में बालक कृष्ण ने कनिष्ठा पर गोवर्धन उठाकर सात दिन व्रज को आश्रय दिया — यह सिखाते हुए कि कृतज्ञता उस भूमि की है जो हमें अन्न देती है। अन्नकूट उन्हीं के सम्मुख वर्ष-भर के व्यंजनों का पर्वत है।
घर पर्वत को लघु रूप में फिर बनाते हैं: गोबर का टीला, चारों ओर भोजन, और उसकी परिक्रमा।
क्या किया जाता है
गोवर्धन प्रतिमा
गोबर से गिरिराज की आकृति और उसकी परिक्रमा।
अन्नकूट भोग
घरों में दर्जनों, मंदिरों में सैकड़ों व्यंजनों का सामूहिक भोग।
गौ पूजा
व्रज की संपदा — गौमाता का पूजन।
श्रेष्ठ समय
पूजन प्रतिपदा के प्रातः अथवा प्रदोष में।
सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।
जानने योग्य
व्रज की गोवर्धन परिक्रमा लगभग 21 कि.मी. — अनेक भक्त नंगे पाँव चलते हैं।
अन्नकूट — 'अन्न का पर्वत' — छप्पन भोग या 108 व्यंजनों तक जाता है, एक ही महाढेर में अर्पित।
नाथद्वारा की श्रीनाथजी हवेली वर्ष का सबसे भव्य अन्नकूट सजाती है — ठाकुर जी के सामने भोजन की सीढ़ियाँ पर्वत की तरह उठती हुई।
इस पर्व के मंत्र
टिप्पणी: प्रतिपदा-स्पर्श के अनुसार कुछ सूचियाँ 9 नवंबर भी लिखती हैं।