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Dharamkira
त्योहार पंचांग
चित्र: चाँदनी में गंगा-तट पर घुटनों के बल बैठी एक स्त्री छोटा दीप जल में छोड़ती है; पीछे विश्राम करती गाय।
गंगा में दीप प्रवाहित करती स्त्रीविलियम सिम्पसन, 19th century

भगवान दत्तात्रेय

दत्तात्रेय जयंती

एक ही बालक में ब्रह्मा-विष्णु-शिव — गुरुओं के गुरु, जिन्हें समस्त सृष्टि ने सिखाया।

बुधवार, 23 दिसंबर 2026सोमवार, 13 दिसंबर 2027

तिथि: मार्गशीर्ष पूर्णिमा

सबसे सरल शब्दों में

दत्तात्रेय जयंती — ब्रह्मा, विष्णु, महेश एक ही सौम्य गुरु-रूप में, जिन्होंने धरती, कबूतर और अजगर तक को अपना गुरु कहा।

कथा और उद्देश्य

अनसूया के सती-धर्म की परीक्षा को त्रिमूर्ति अशक्य माँग वाले भिक्षुओं के रूप में आए; उनकी पवित्रता ने तीनों को शिशु कर दिया, और अत्रि-आश्रम में तीनों एक बालक में विलीन हुए — 'दत्त' (दिया हुआ) आत्रेय। तीन मुख, षड्भुज, चार श्वान (चारों वेद), संग कामधेनु: समूचा ब्रह्मांड एक गुरु-मूर्ति में।

भागवत के दत्तात्रेय चौबीस गुरु गिनाते हैं — पृथ्वी, वायु, कपोत, समुद्र, गणिका, बाण-निर्माता — क्योंकि विवेकी सबसे सीखता है। अवधूत हर चौखट से मुक्त चलते हैं; महाराष्ट्र-कर्नाटक की दत्त-परंपरा जयंती-सप्ताह गुरुचरित्र-पारायण से मनाती है।

क्या किया जाता है

दत्त पूजन

संभव हो तो औदुंबर तले त्रिमूर्ति-रूप का पूजन — उनका प्रिय वृक्ष।

गुरुचरित्र पारायण

दत्त-परंपरा में सप्ताह-पारायण, समापन जयंती को।

गुरु जाप

ॐ दत्तात्रेयाय नमः, अथवा गुरुर्ब्रह्मा — गुरु-परंपरा वंदन।

अन्न-सेवा

परिव्राजकों और क्षुधितों को भोजन — दत्त अनपेक्षित अतिथि रूप में आते हैं।

श्रेष्ठ समय

पूजा गोधूलि से पूर्णिमा-चंद्रोदय तक।

सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।

जानने योग्य

  • गाणगापुर, नृसिंहवाड़ी और गिरनार उनके महान स्थान हैं; गिरनार की दस सहस्र सीढ़ियाँ उनकी पादुकाओं पर पूर्ण होती हैं।

  • 'दिगंबरा दिगंबरा श्रीपाद वल्लभ दिगंबरा' — परंपरा की प्रिय धुन।

  • वे परंपरा-रेखाओं के आर-पार पूज्य हैं — नाथ योगी, महानुभाव, और सूफ़ी-समीप दरगाहें तक दत्त-नाम रखती हैं।

इस पर्व के मंत्र