
झूलेलाल
चेटी चंड
सिंधी नववर्ष — और जल के देवता झूलेलाल का जन्मदिवस।
तिथि: चैत्र शुक्ल द्वितीया — सिंधी वर्ष का प्रथम चंद्र-दर्शन।
सबसे सरल शब्दों में
सिंधी नववर्ष और झूलेलाल का जन्मदिन — जल-देवता जो अपने लोगों की रक्षा को नदी से प्रकट हुए; उनकी स्मृति में जल पर दीये तैरते हैं।
कथा और उद्देश्य
परंपरा कहती है कि जब अत्याचारी मिरखशाह ने सिंधु समाज को धमकाया, तो लोगों ने सिंधु-तट पर चालीस दिन प्रार्थना की — और नदी से प्रकट हुए झूलेलाल: पल्ला मछली पर विराजित बाल-संत, वरुण के अवतार, जिन्होंने जल के धैर्य से ही अत्याचारी को झुका दिया।
चेटी चंड — चेट मास का चाँद — उन्हीं के नाम से सिंधी वर्ष आरंभ करता है। बहिराणा साहिब — दीप और अर्पण की झाँकी — शोभायात्रा में जाकर जल को समर्पित होती है; 'झूले झूले झूलेलाल' वहाँ-वहाँ गूँजता है जहाँ-जहाँ सिंधी बसे हैं।
क्या किया जाता है
बहिराणा साहिब
ज्योत, मिश्री, फोटा, फल और अक्खा की थाली शोभायात्रा में जाकर नदी या सागर को अर्पित।
छेज और शोभायात्रा
सिंधी लोकनृत्य छेज और सामुदायिक मेला — वर्ष अकेले नहीं, साथ आरंभ होता है।
जल-वंदन
जल-तट पर वरुण का धन्यवाद; बहते जल पर नववर्ष के संकल्प।
श्रेष्ठ समय
शोभायात्राएँ संध्या को जुटती हैं — द्वितीया के चंद्र-दर्शन के बाद।
सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।
जानने योग्य
'जेको चवंदो झूलेलाल, तेंहिजा थींदा बेड़ा पार' — जो झूलेलाल को स्मरण करे, उसकी नौका पार लगे — यही सिंधी आशीर्वाद है।
विभाजन में बिखरे समाज के लिए यह दिन एक साथ मातृभूमि, पंचांग और पहचान है।
झूलेलाल सिंधी हिन्दुओं और अनेक सिंधी सूफ़ियों — दोनों के पूज्य हैं — बीच की नदी के संत।