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Dharamkira
त्योहार पंचांग
नारियल रखा कलश, श्वेत-लाल पुष्पमालाओं से लिपटा, दोनों ओर केले के पत्ते।
पूजा के लिए सजा कलश, कर्नाटकMikeLynch, 2011

भूमि, गौधन और श्रीकृष्ण

बोहाग बिहू

असम का रंगाली बिहू — गौ-पूजन, बड़ों को प्रणाम और बिहू नृत्य से वर्ष खुलता है।

असम
गोरु बिहू (14 अप्रैल) → सात दिन; मानुह बिहू बोहाग 1 (15 अप्रैल) को: बुधवार, 14 अप्रैल 2027

तिथि: चोत का अंतिम दिन (संक्रांति) और बोहाग 1 — असमिया सौर नववर्ष।

सबसे सरल शब्दों में

असम का सबसे खुशहाल सप्ताह — ढोल-पेपा के साथ नववर्ष नाचता आता है, गायों को नहलाकर सम्मान मिलता है, और सब सबसे मिलने जाते हैं।

कथा और उद्देश्य

रंगाली — 'आनंदमय' — बिहू असमिया नववर्ष और बुवाई ऋतु का सात-दिवसीय स्वागत है। आरंभ 'गोरु बिहू' से: गौधन को हल्दी-उड़द से नदी-स्नान, दिघलति-माखियति की कोमल टहनियों का स्पर्श, और गीत में आशीष — 'खूब बढ़ो, दीर्घायु हो।'

फिर 'मानुह बिहू': नए वस्त्र, बड़ों को गामोसा — असम का सम्मान-वस्त्र — और पुराने वर्ष की क्षमा-याचना। इसके बाद ढोल-पेपा के साथ बिहू नृत्य से खेत-मैदान रातों तक गूँजते हैं।

क्या किया जाता है

गोरु बिहू

गौधन को स्नान, लेप, माला और पिठा — वर्ष की पहली कृतज्ञता।

गामोसा और सेवा

बिहुवान गामोसा बड़ों-अतिथियों को अर्पित; आशीर्वाद ग्रहण।

हुसौरी

गायक-मंडलियाँ आँगन-आँगन आशीर्वाद पहुँचाती हैं — उत्सवी वेश में नामघर-भक्ति।

श्रेष्ठ समय

गोरु बिहू प्रातः नदी-तट पर; हुसौरी और नृत्य संध्याओं में।

सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।

जानने योग्य

  • बिहू तीन हैं — रंगाली (वसंत), कंगाली (शारदीय संयम), भोगाली (फ़सल-भोज); यह आनंद वाला है।

  • बिहू नृत्य और ढोल प्राग्-वैदिक कृषि-स्मृति सँजोए हैं — भारत की प्राचीनतम जीवित लोक-विधाओं में।

  • सत्रों (वैष्णव मठों) में दिन कृष्ण के नाम-प्रसंग से खुलता है।

इस पर्व के मंत्र