
यम-यमुना
भाई दूज
बहन का वह तिलक जिसे स्वयं यमराज ने माना।
तिथि: कार्तिक शुक्ल द्वितीया
सबसे सरल शब्दों में
दिवाली सप्ताह का बहन-दिवस: बहन भाई के माथे पर तिलक कर लम्बी उम्र माँगती है; भाई सदा साथ निभाने का वचन देता है।
कथा और उद्देश्य
यमुना ने इसी द्वितीया को भाई यम को भोजन कराया और तिलक किया; प्रसन्न यम ने वर दिया कि इस दिन बहन से तिलकित हर भाई सुरक्षित रहेगा। दीपावली का पंचक वहीं पूर्ण होता है जहाँ राखी आरंभ हुई थी — भाई-बहन के बंधन में।
यह दिन यम के लेखा-अधिकारी का भी है: प्रत्येक कर्म के लेखक चित्रगुप्त की इसी द्वितीया को कायस्थ परंपरा में कलम-दवात से पूजा होती है — दीपावली-चक्र के समापन पर लेखा और स्नेह साथ-साथ। आज भाई के संग यमुना-स्नान विशेष फलदायी माना गया है: प्रथम बहन के रूप में परंपरा स्वयं नदी ने रची।
क्या किया जाता है
तिलक-आरती
बहन का तिलक, आरती, मिठाई; भाई का उपहार और वचन।
सह-भोजन
बहन के घर भोजन ही पर्व का हृदय है।
श्रेष्ठ समय
तिलक हेतु अपराह्न शास्त्रीय काल है।
सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।
जानने योग्य
महाराष्ट्र में भाऊबीज; बंगाल में भाई फोंटा — अपने मंत्रों सहित।
तिथि का पुराना नाम यम द्वितीया है; बांग्ला फोंटा की तुकबंदी इसे सीधे कहती है — बहन के तिलक से 'यम के द्वार पर काँटा पड़ता है'।
नेपाल में यही दिन भाई टीका है, तिहार के पाँच दिनों का अन्तिम — भाई के माथे पर सात रंगों का टीका।