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Dharamkira
त्योहार पंचांग
सिंह पर सवार, अनेक भुजाओं में शस्त्र लिए महिषासुर का वध करती देवी दुर्गा — रवि वर्मा प्रेस का चित्र।
दुर्गा महिषासुरमर्दिनीरवि वर्मा प्रेस, c. 1910

गौरी बतुकम्मा रूप में — 'माँ, जीवित रहो!'

बतुकम्मा

तेलंगाना का पुष्प-शिखर पर्व — हर संध्या फूलों से नई रची जाती देवी।

तेलंगाना
एंगिली पूला बतुकम्मा (आरंभ): शनिवार, 10 अक्टूबर 2026सद्दुला बतुकम्मा (समापन): रविवार, 18 अक्टूबर 2026एंगिली पूला बतुकम्मा 2027 (आरंभ): बुधवार, 29 सितंबर 2027सद्दुला बतुकम्मा 2027 (समापन): गुरुवार, 7 अक्टूबर 2027

तिथि: महालया अमावस्या से दुर्गाष्टमी तक नौ दिन।

सबसे सरल शब्दों में

तेलंगाना का पुष्प-पर्व — स्त्रियाँ गेंदे और गुनुका के फूलों के रंगीन शिखर सजाती हैं, उनके चारों ओर घूमकर गाती हैं, फिर उन्हें जल में विदा करती हैं।

कथा और उद्देश्य

बतुकम्मा — 'माँ देवी, जीवित हो उठो' — स्थापित नहीं, रची जाती है: गुनुका, तंगेडु, बंती, चामंती फूलों के वलय एक उज्ज्वल शिखर में सजते हैं, शीर्ष पर हल्दी की गौरम्मा। हर संध्या स्त्रियाँ पुष्प-देवियों की परिक्रमा में 'बतुकम्मा बतुकम्मा उय्यालो' गाती, तालियों से वृत्त रचती हैं।

सद्दुला बतुकम्मा को सबसे ऊँची पुष्प-देवियाँ तालाबों-नदियों तक जातीं और मलीदा-प्रसाद संग प्रवाहित होती हैं — माँ उन्हीं जलों को लौटती हैं जिन्होंने फूल उगाए। यह पर्व — अब तेलंगाना का राजकीय उत्सव — पूजा-रूप में पारिस्थितिकी है: वनपुष्प, जल, और स्त्री-स्वर।

क्या किया जाता है

बतुकम्मा रचना

थाली पर ऋतु-पुष्पों के वलय — समापन पर सबसे ऊँची; शीर्ष पर हल्दी की गौरम्मा।

संध्या मंडल

स्त्रियों की परिक्रमा — सवाल-जवाब शैली के बतुकम्मा गीत।

प्रवाह और मलीदा

पुष्प-देवी जल में प्रवाहित; मलीदा (रोटी-गुड़) वितरण।

श्रेष्ठ समय

मंडल प्रति संध्या गोधूलि में; प्रवाह अंतिम संध्या को।

सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।

जानने योग्य

  • तंगेडु और गुनुका — पर्व के फूल — परंपरा में उन तालाबों को निर्मल करने वाले माने जाते हैं जिनमें वे प्रवाहित होते हैं।

  • सद्दुला की संध्या हैदराबाद के तालाब-तट सहस्रों तैरते पुष्प-शिखरों से दमकते हैं।

  • अनेक घर पूर्व-सप्ताह में मिट्टी की गौरी — बोड्डेम्मा — की पूर्विका रखते हैं।

इस पर्व के मंत्र

टिप्पणी: गाँव-नगर की तिथियाँ एंगिली पूला → सद्दुला चाप से एक दिन इधर-उधर हो सकती हैं; स्थानीय मंदिर-पंचांग निर्णायक।