सीधे सामग्री पर जाएँ
Dharamkira
पूजा विधि
पत्थर पर उकेरा नवग्रह-पट्ट: पंक्ति में खड़े नौ ग्रह-देव, हर एक अपने मेहराब के नीचे।
नवग्रह, बिहार, दसवीं शताब्दीडेडरो (छायाचित्र); शिल्पी अज्ञात, 10th century (photographed 2016)

नवग्रह · 30–45 मिनट

नवग्रह शांति — नवग्रह जाप

शनिवार/अमावस्या; शुभारंभ से पूर्व; ज्योतिषी की ग्रह-शांति सलाह पर

सबसे सरल शब्दों में

नवों ग्रहों का क्रम से कोमल जाप — प्रत्येक के ग्यारह, जिसके साथ अधिक बैठना हो उसकी पूरी माला — भय से नहीं, स्थिरता के भाव से।

नवग्रह आकाश का पाठ्यक्रम हैं — प्रत्येक एक गुण जिसे साधना है: सूर्य का तेज, चंद्र का मन, मंगल का पराक्रम, बुध की वाणी, गुरु का विवेक, शुक्र का सौंदर्य-बोध, शनि का अनुशासन, राहु की क्षुधा, केतु का वैराग्य। यह गृह-विधि नौ बीज मंत्रों का पारंपरिक क्रम में सरल जाप-चक्र है।

यह पूजा करें

10 चरण, एक-एक करके — दीये, मंत्रों और घंटी के साथ, इसी स्क्रीन पर।

सामग्री

0/3 एकत्र

विधि, चरण-दर-चरण

0/10 पूर्ण
  1. संकल्प और गणेश

    दीप और अगरबत्ती जलाएँ; सम्मुख अक्षत-पुष्प — नौ अन्न-पुंज रखे हों तो नीचे के क्रम में सजाएँ और जिस ग्रह की बारी आए, उसका पुंज स्पर्श करें। संकल्प कहें (ग्रह-शांति, उनके गुणों की स्थिरता), और सदा की भाँति गणपति से आरंभ।

    ॐ गं गणपतये नमः

    Oṁ Gaṁ Gaṇapataye Namaḥ

    ॐ — गं — गणों के स्वामी गणपति को प्रणाम। गण शिव के अनुचर-समूह हैं; भक्त-टीकाकार इस शब्द को संसार की हर व्यवस्थित शक्ति तक फैलाते हैं — और गणपति वह मेधा हैं जो उन्हें व्यवस्थित करती है। यह मंत्र लघु रूप में एक प्रार्थना है: जो मार्ग रोकता है वह हट जाए, और जो बिखरा है वह क्रम में आ जाए।

    स्रोत: गणपति अथर्वशीर्ष (गणपति उपनिषद)

  2. सूर्य

    सूर्य बीज — स्पष्टता और न्यायपूर्ण तेज।

    ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः

    Oṁ hrāṁ hrīṁ hrauṁ saḥ sūryāya namaḥ

    ॐ — 'ह्रां ह्रीं ह्रौं सः' बीजाक्षरों सहित — सूर्य को प्रणाम। कुंडली में सूर्य आत्मा की अपनी अग्नि हैं: प्राणशक्ति, गरिमा, पितृ-पक्ष, सामने खड़े होने का बल। साधक प्रार्थना करता है कि यह अग्नि स्थिर जले — जीवन को झुलसाए नहीं, तपाकर सँवारे।

    स्रोत: नवग्रह बीज-मंत्र परंपरा (ज्योतिष / ग्रह-शांति)

  3. चंद्र

    चंद्र बीज — शीतल, सौम्य मन।

    ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः

    Oṁ śrāṁ śrīṁ śrauṁ saḥ candrāya namaḥ

    ॐ — 'श्रां श्रीं श्रौं सः' बीजाक्षरों सहित — चन्द्रमा को प्रणाम। चन्द्र घटते-बढ़ते हैं, और ज्योतिष कहता है कि मन उन्हीं के साथ चलता है। जाप प्रार्थना है कि उसके ज्वार कोमल हों: भावनाएँ जल पर चाँदनी-सी चलें, तूफ़ानी लहरों-सी नहीं।

    स्रोत: नवग्रह बीज-मंत्र परंपरा (ज्योतिष / ग्रह-शांति)

  4. मंगल

    मंगल — निष्ठुरता-रहित साहस।

    ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः

    Oṁ krāṁ krīṁ krauṁ saḥ bhaumāya namaḥ

    ॐ — 'क्रां क्रीं क्रौं सः' बीजाक्षरों सहित — भूमिपुत्र भौम (मंगल) को प्रणाम। मंगल वह ताप हैं जो गढ़ भी सकता है और तोड़ भी। जाप प्रार्थना है कि उनकी धार क्रोध और उतावली नहीं — साहस, सहनशक्ति और स्वच्छ निर्णय बने।

    स्रोत: नवग्रह बीज-मंत्र परंपरा (ज्योतिष / ग्रह-शांति)

  5. बुध

    बुध — निर्मल वाणी, तीव्र ग्रहण-शक्ति।

    ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः

    Oṁ brāṁ brīṁ brauṁ saḥ budhāya namaḥ

    ॐ — 'ब्रां ब्रीं ब्रौं सः' बीजाक्षरों सहित — बुध को प्रणाम। बुध मनों के बीच के सेतुओं के अधिपति हैं: वाणी, बुद्धि, गणित, व्यापार। जाप प्रार्थना है कि विचार निर्मल उतरे और शब्द ठीक जगह पहुँचें — चतुराई पककर समझ बने।

    स्रोत: नवग्रह बीज-मंत्र परंपरा (ज्योतिष / ग्रह-शांति)

  6. गुरु

    गुरु — विवेक, विस्तार, अंतर्यामी शिक्षक।

    ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः

    Oṁ grāṁ grīṁ grauṁ saḥ gurave namaḥ

    ॐ — 'ग्रां ग्रीं ग्रौं सः' बीजाक्षरों सहित — देवगुरु बृहस्पति को प्रणाम। गुरु विस्तार हैं — ज्ञान, भाग्य, संतति, श्रद्धा। जाप सही दिशा में बढ़त की प्रार्थना है: जीवन वैसे बड़ा हो जैसे वटवृक्ष होता है — छाया समेत।

    स्रोत: नवग्रह बीज-मंत्र परंपरा (ज्योतिष / ग्रह-शांति)

  7. शुक्र

    शुक्र — प्रेम, कला, परिष्कार।

    ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः

    Oṁ drāṁ drīṁ drauṁ saḥ śukrāya namaḥ

    ॐ — 'द्रां द्रीं द्रौं सः' बीजाक्षरों सहित — शुक्र को प्रणाम — असुरों के आचार्य, और जीवन को मधुर बनाने वाले हर तत्त्व के अधिपति। जाप प्रार्थना है कि सौंदर्य, प्रेम और सुख तृष्णा बनकर नहीं, वरदान बनकर आएँ — और स्थिर हृदय से स्वीकारे जाएँ।

    स्रोत: नवग्रह बीज-मंत्र परंपरा (ज्योतिष / ग्रह-शांति)

  8. शनि

    शनि — धैर्य और निष्कपट श्रम।

    ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः

    Oṁ prāṁ prīṁ prauṁ saḥ śanaiścarāya namaḥ

    ॐ — 'प्रां प्रीं प्रौं सः' बीजाक्षरों सहित — शनैश्चर ('धीरे चलने वाले') को प्रणाम। शनि समय से पहले कुछ नहीं देते, और अर्जित किया हुआ कुछ नहीं रोकते। यह जाप कठोरतम शिक्षक को साधक का प्रणाम है — पाठ के दौरान सहनशक्ति की, और पाठ के फल की प्रार्थना।

    स्रोत: नवग्रह बीज-मंत्र परंपरा (ज्योतिष / ग्रह-शांति)

  9. राहु

    राहु — दिशा पाई हुई महत्वाकांक्षा।

    ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः

    Oṁ bhrāṁ bhrīṁ bhrauṁ saḥ rāhave namaḥ

    ॐ — 'भ्रां भ्रीं भ्रौं सः' बीजाक्षरों सहित — राहु (उत्तर छाया-बिंदु) को प्रणाम — वह छाया जो ग्रहण में सूर्य को ग्रस लेती है। राहु अथाह भूख हैं — महत्वाकांक्षा, धुन, अपरंपरागत पथ। जाप प्रार्थना है कि यह प्रबल खिंचाव किसी ऐसी दिशा में मुड़े जहाँ पहुँचना सार्थक हो।

    स्रोत: नवग्रह बीज-मंत्र परंपरा (ज्योतिष / ग्रह-शांति)

  10. केतु

    केतु — मोक्षोन्मुख वैराग्य। ॐ शांति की एक श्वास से समापन।

    ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः

    Oṁ srāṁ srīṁ srauṁ saḥ ketave namaḥ

    ॐ — 'स्रां स्रीं स्रौं सः' बीजाक्षरों सहित — केतु (दक्षिण छाया-बिंदु) को प्रणाम — जो जिया जा चुका, उसकी ध्वजा। केतु छुड़ाते हैं, हटाते हैं। जाप प्रार्थना है कि यह छूटना हानि नहीं, मुक्ति हो — वह वैराग्य जो अंतर्दृष्टि में, और अंततः मोक्ष में, खुले।

    स्रोत: नवग्रह बीज-मंत्र परंपरा (ज्योतिष / ग्रह-शांति)

टिप्पणी: पूर्ण नवग्रह हवन और दान-उपाय योग्य पुरोहित/ज्योतिषी से होते हैं — यह गाइड सुरक्षित गृह-साधना है, विकल्प नहीं। ज्योतिष-परामर्श व्यक्तिगत चुनाव है; मंत्रों के गुण स्वयं-सिद्ध हैं।

शनि जयंतीसोमवती अमावस्या