
नवग्रह · 30–45 मिनट
नवग्रह शांति — नवग्रह जाप
शनिवार/अमावस्या; शुभारंभ से पूर्व; ज्योतिषी की ग्रह-शांति सलाह पर
सबसे सरल शब्दों में
नवों ग्रहों का क्रम से कोमल जाप — प्रत्येक के ग्यारह, जिसके साथ अधिक बैठना हो उसकी पूरी माला — भय से नहीं, स्थिरता के भाव से।
नवग्रह आकाश का पाठ्यक्रम हैं — प्रत्येक एक गुण जिसे साधना है: सूर्य का तेज, चंद्र का मन, मंगल का पराक्रम, बुध की वाणी, गुरु का विवेक, शुक्र का सौंदर्य-बोध, शनि का अनुशासन, राहु की क्षुधा, केतु का वैराग्य। यह गृह-विधि नौ बीज मंत्रों का पारंपरिक क्रम में सरल जाप-चक्र है।
सामग्री
0/3 एकत्रविधि, चरण-दर-चरण
0/10 पूर्णसंकल्प और गणेश
दीप और अगरबत्ती जलाएँ; सम्मुख अक्षत-पुष्प — नौ अन्न-पुंज रखे हों तो नीचे के क्रम में सजाएँ और जिस ग्रह की बारी आए, उसका पुंज स्पर्श करें। संकल्प कहें (ग्रह-शांति, उनके गुणों की स्थिरता), और सदा की भाँति गणपति से आरंभ।
ॐ गं गणपतये नमः
Oṁ Gaṁ Gaṇapataye Namaḥ
ॐ — गं — गणों के स्वामी गणपति को प्रणाम। गण शिव के अनुचर-समूह हैं; भक्त-टीकाकार इस शब्द को संसार की हर व्यवस्थित शक्ति तक फैलाते हैं — और गणपति वह मेधा हैं जो उन्हें व्यवस्थित करती है। यह मंत्र लघु रूप में एक प्रार्थना है: जो मार्ग रोकता है वह हट जाए, और जो बिखरा है वह क्रम में आ जाए।
स्रोत: गणपति अथर्वशीर्ष (गणपति उपनिषद)
सूर्य
सूर्य बीज — स्पष्टता और न्यायपूर्ण तेज।
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
Oṁ hrāṁ hrīṁ hrauṁ saḥ sūryāya namaḥ
ॐ — 'ह्रां ह्रीं ह्रौं सः' बीजाक्षरों सहित — सूर्य को प्रणाम। कुंडली में सूर्य आत्मा की अपनी अग्नि हैं: प्राणशक्ति, गरिमा, पितृ-पक्ष, सामने खड़े होने का बल। साधक प्रार्थना करता है कि यह अग्नि स्थिर जले — जीवन को झुलसाए नहीं, तपाकर सँवारे।
स्रोत: नवग्रह बीज-मंत्र परंपरा (ज्योतिष / ग्रह-शांति)
चंद्र
चंद्र बीज — शीतल, सौम्य मन।
ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः
Oṁ śrāṁ śrīṁ śrauṁ saḥ candrāya namaḥ
ॐ — 'श्रां श्रीं श्रौं सः' बीजाक्षरों सहित — चन्द्रमा को प्रणाम। चन्द्र घटते-बढ़ते हैं, और ज्योतिष कहता है कि मन उन्हीं के साथ चलता है। जाप प्रार्थना है कि उसके ज्वार कोमल हों: भावनाएँ जल पर चाँदनी-सी चलें, तूफ़ानी लहरों-सी नहीं।
स्रोत: नवग्रह बीज-मंत्र परंपरा (ज्योतिष / ग्रह-शांति)
मंगल
मंगल — निष्ठुरता-रहित साहस।
ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः
Oṁ krāṁ krīṁ krauṁ saḥ bhaumāya namaḥ
ॐ — 'क्रां क्रीं क्रौं सः' बीजाक्षरों सहित — भूमिपुत्र भौम (मंगल) को प्रणाम। मंगल वह ताप हैं जो गढ़ भी सकता है और तोड़ भी। जाप प्रार्थना है कि उनकी धार क्रोध और उतावली नहीं — साहस, सहनशक्ति और स्वच्छ निर्णय बने।
स्रोत: नवग्रह बीज-मंत्र परंपरा (ज्योतिष / ग्रह-शांति)
बुध
बुध — निर्मल वाणी, तीव्र ग्रहण-शक्ति।
ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः
Oṁ brāṁ brīṁ brauṁ saḥ budhāya namaḥ
ॐ — 'ब्रां ब्रीं ब्रौं सः' बीजाक्षरों सहित — बुध को प्रणाम। बुध मनों के बीच के सेतुओं के अधिपति हैं: वाणी, बुद्धि, गणित, व्यापार। जाप प्रार्थना है कि विचार निर्मल उतरे और शब्द ठीक जगह पहुँचें — चतुराई पककर समझ बने।
स्रोत: नवग्रह बीज-मंत्र परंपरा (ज्योतिष / ग्रह-शांति)
गुरु
गुरु — विवेक, विस्तार, अंतर्यामी शिक्षक।
ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः
Oṁ grāṁ grīṁ grauṁ saḥ gurave namaḥ
ॐ — 'ग्रां ग्रीं ग्रौं सः' बीजाक्षरों सहित — देवगुरु बृहस्पति को प्रणाम। गुरु विस्तार हैं — ज्ञान, भाग्य, संतति, श्रद्धा। जाप सही दिशा में बढ़त की प्रार्थना है: जीवन वैसे बड़ा हो जैसे वटवृक्ष होता है — छाया समेत।
स्रोत: नवग्रह बीज-मंत्र परंपरा (ज्योतिष / ग्रह-शांति)
शुक्र
शुक्र — प्रेम, कला, परिष्कार।
ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः
Oṁ drāṁ drīṁ drauṁ saḥ śukrāya namaḥ
ॐ — 'द्रां द्रीं द्रौं सः' बीजाक्षरों सहित — शुक्र को प्रणाम — असुरों के आचार्य, और जीवन को मधुर बनाने वाले हर तत्त्व के अधिपति। जाप प्रार्थना है कि सौंदर्य, प्रेम और सुख तृष्णा बनकर नहीं, वरदान बनकर आएँ — और स्थिर हृदय से स्वीकारे जाएँ।
स्रोत: नवग्रह बीज-मंत्र परंपरा (ज्योतिष / ग्रह-शांति)
शनि
शनि — धैर्य और निष्कपट श्रम।
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः
Oṁ prāṁ prīṁ prauṁ saḥ śanaiścarāya namaḥ
ॐ — 'प्रां प्रीं प्रौं सः' बीजाक्षरों सहित — शनैश्चर ('धीरे चलने वाले') को प्रणाम। शनि समय से पहले कुछ नहीं देते, और अर्जित किया हुआ कुछ नहीं रोकते। यह जाप कठोरतम शिक्षक को साधक का प्रणाम है — पाठ के दौरान सहनशक्ति की, और पाठ के फल की प्रार्थना।
स्रोत: नवग्रह बीज-मंत्र परंपरा (ज्योतिष / ग्रह-शांति)
राहु
राहु — दिशा पाई हुई महत्वाकांक्षा।
ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः
Oṁ bhrāṁ bhrīṁ bhrauṁ saḥ rāhave namaḥ
ॐ — 'भ्रां भ्रीं भ्रौं सः' बीजाक्षरों सहित — राहु (उत्तर छाया-बिंदु) को प्रणाम — वह छाया जो ग्रहण में सूर्य को ग्रस लेती है। राहु अथाह भूख हैं — महत्वाकांक्षा, धुन, अपरंपरागत पथ। जाप प्रार्थना है कि यह प्रबल खिंचाव किसी ऐसी दिशा में मुड़े जहाँ पहुँचना सार्थक हो।
स्रोत: नवग्रह बीज-मंत्र परंपरा (ज्योतिष / ग्रह-शांति)
केतु
केतु — मोक्षोन्मुख वैराग्य। ॐ शांति की एक श्वास से समापन।
ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः
Oṁ srāṁ srīṁ srauṁ saḥ ketave namaḥ
ॐ — 'स्रां स्रीं स्रौं सः' बीजाक्षरों सहित — केतु (दक्षिण छाया-बिंदु) को प्रणाम — जो जिया जा चुका, उसकी ध्वजा। केतु छुड़ाते हैं, हटाते हैं। जाप प्रार्थना है कि यह छूटना हानि नहीं, मुक्ति हो — वह वैराग्य जो अंतर्दृष्टि में, और अंततः मोक्ष में, खुले।
स्रोत: नवग्रह बीज-मंत्र परंपरा (ज्योतिष / ग्रह-शांति)
टिप्पणी: पूर्ण नवग्रह हवन और दान-उपाय योग्य पुरोहित/ज्योतिषी से होते हैं — यह गाइड सुरक्षित गृह-साधना है, विकल्प नहीं। ज्योतिष-परामर्श व्यक्तिगत चुनाव है; मंत्रों के गुण स्वयं-सिद्ध हैं।