नवग्रह
शुक्र ग्रह मंत्र
ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः
Oṁ drāṁ drīṁ drauṁ saḥ śukrāya namaḥ
सरल उच्चारण: Om draam dreem draum sah shuk-raa-ya na-mah
इस मंत्र के विषय में
शुक्र का बीज-मंत्र — पुराणों के शुक्राचार्य, असुरों के गुरु। ज्योतिष शुक्र को प्रेम, सौंदर्य, कला, सुख और जीवनसाथी का कारक मानता है।
अर्थ
ॐ — 'द्रां द्रीं द्रौं सः' बीजाक्षरों सहित — शुक्र को प्रणाम — असुरों के आचार्य, और जीवन को मधुर बनाने वाले हर तत्त्व के अधिपति। जाप प्रार्थना है कि सौंदर्य, प्रेम और सुख तृष्णा बनकर नहीं, वरदान बनकर आएँ — और स्थिर हृदय से स्वीकारे जाएँ।
कब जपें
शुक्रवार; सम्बन्ध और विवाह के विषयों में, कलाकारों द्वारा अपनी साधना से पहले, और जहाँ सुख तृष्णा बनने लगे और उसे थामना हो।
शब्द-दर-शब्द
- ॐoṁ
- प्रणव
- द्रां द्रीं द्रौं सःdrāṁ drīṁ drauṁ saḥ
- इस ग्रह के बीजाक्षर
- शुक्रायśukrāya
- शुक्र के लिए
- नमःnamaḥ
- प्रणाम, नमन
स्रोत: नवग्रह बीज-मंत्र परंपरा (ज्योतिष / ग्रह-शांति)
टिप्पणी: यहाँ प्रचलित रूप दिया गया है; कुल और क्षेत्रीय परंपराओं में शब्द-रूप थोड़ा भिन्न हो सकता है।

