सूर्य
सविता — सबको जगाने वाले, प्राणदायक (सूर्य के बारह नामों में दसवाँ)
ॐ सवित्रे नमः
सरल उच्चारण
Om sa-vit-re na-mah
Oṁ Savitre Namaḥ
इस मंत्र के विषय में
सविता — 'प्राणदायक, जगाने वाला' — दसवाँ नाम, और सबसे वैदिक: स्वयं गायत्री मंत्र के देवता यही हैं। सविता सूर्य की जगाने वाली शक्ति हैं — वह सुनहरा स्पंदन जो बीजों, बुद्धियों और भोरों को कारण जाने बिना ही सक्रिय कर देता है।
अर्थ
ॐ, सविता को प्रणाम — जगाने वाले, सबमें स्पंदन भरने वाले। यही वह रूप है जिससे स्वयं गायत्री प्रार्थना करती है: वह प्रेरणा जो स्थिरता को विकास बना देती है। एक प्रणाम में साधक वही माँगता है जो हर बीज को अनायास मिलता है — जागरण।
मंत्र कंठस्थ करें
पहली पंक्ति तब तक बोलें जब तक वह बिना पढ़े न आ जाए, फिर अगली पंक्ति जोड़कर दोनों बोलें, जब तक पूरा मंत्र अपने आप न आ जाए।
पूरा मंत्र
यह मंत्र एक ही पंक्ति का है। इसे पूरा सीखें, फिर अपनी पुनरावृत्ति सूची में जोड़ें ताकि यह जाँच के लिए वापस आए।
ॐ सवित्रे नमः
Oṁ Savitre Namaḥ
0अभी नहीं बोला
ग्यारह बार का लक्ष्य रखें। जैसे ही पूरा मंत्र अपने आप आने लगे, पढ़ना छोड़ दें।
प्रगति केवल इसी डिवाइस पर रहती है।
कब जपें
सूर्य नमस्कार चक्र के बारह नामों में से एक — सूर्योदय पर प्रति आसन एक नाम, या रविवार के जाप में बारहों नाम एक साथ। जो सोया है उसे जगाने का नाम — परीक्षा के दिन, नए अनुशासन, और अंतराल के बाद फिर से उठाई गई कोई भी साधना।
शब्द-दर-शब्द
- ॐoṁ
- प्रणव, आदि नाद
- सवित्रेsavitre
- सबको जगाने वाले, प्राणदायक
- नमःnamaḥ
- प्रणाम, नमन
स्रोत: सूर्य नमस्कार मंत्र-क्रम (सूर्य के पारंपरिक बारह नाम)

