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सूर्य

खग — आकाश में विचरने वाले (सूर्य के बारह नामों में पाँचवाँ)

ॐ खगाय नमः

सरल उच्चारण

Om kha-gaa-ya na-mah

Oṁ Khagāya Namaḥ

शुभारंभबल और साहसआरोग्य

इस मंत्र के विषय में

खग — 'आकाश में विचरने वाला' — 'ख' यानी खुला आकाश, 'ग' यानी गमन करने वाला। पाँचवाँ नाम सूर्य को उस महायात्री रूप में निहारता है जिसके आकाश पार करने से स्वयं समय बनता है: प्रहर, ऋतुएँ और वर्ष — सब खग के पथ के मील-पत्थर हैं।

अर्थ

ॐ, खग को प्रणाम — नभ-गामी। यह प्रणाम उस एक यात्री को है जो न कभी रुकता है, न कभी हड़बड़ाता है: हर दिन वही पथ, वही गति। साधक अपने दिन के सफ़र में वही स्थिरता माँगता है।

मंत्र कंठस्थ करें

पहली पंक्ति तब तक बोलें जब तक वह बिना पढ़े न आ जाए, फिर अगली पंक्ति जोड़कर दोनों बोलें, जब तक पूरा मंत्र अपने आप न आ जाए।

पूरा मंत्र

यह मंत्र एक ही पंक्ति का है। इसे पूरा सीखें, फिर अपनी पुनरावृत्ति सूची में जोड़ें ताकि यह जाँच के लिए वापस आए।

ॐ खगाय नमः

Oṁ Khagāya Namaḥ

0अभी नहीं बोला

ग्यारह बार का लक्ष्य रखें। जैसे ही पूरा मंत्र अपने आप आने लगे, पढ़ना छोड़ दें।

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कब जपें

सूर्य नमस्कार चक्र के बारह नामों में से एक — सूर्योदय पर प्रति आसन एक नाम, या रविवार के जाप में बारहों नाम एक साथ। खग नियमित दिनचर्या का नाम है — इसे वे जपते हैं जो स्थिर दैनिक क्रम गढ़ रहे हों, और यात्रा पर निकलने वाले भी।

शब्द-दर-शब्द

ॐoṁ
प्रणव, आदि नाद
खगायkhagāya
आकाश में विचरने वाले
नमःnamaḥ
प्रणाम, नमन

स्रोत: सूर्य नमस्कार मंत्र-क्रम (सूर्य के पारंपरिक बारह नाम)

ॐ खगाय नमः

Oṁ Khagāya Namaḥ

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