सूर्य
भास्कर — प्रकाश और प्रज्ञा के कर्ता (सूर्य के बारह नामों में बारहवाँ)
ॐ भास्कराय नमः
Oṁ Bhāskarāya Namaḥ
सरल उच्चारण: Om bhaas-ka-raa-ya na-mah
इस मंत्र के विषय में
भास्कर — 'प्रकाश के कर्ता' — बारह नामों का समापन: 'भास्' यानी प्रकाश, 'कर' यानी करने वाला। जो चक्र मैत्री से खुला था, वह पूर्णतम अर्थ के आलोक पर विश्राम पाता है — सूर्य केवल दिन के उजाले के नहीं, बोध के भी रचयिता: वह भीतरी उजास जिससे कोई भी वस्तु सचमुच दिखती है।
अर्थ
ॐ, भास्कर को प्रणाम — प्रकाश के कर्ता, प्रज्ञा के कर्ता। अंतिम नाम बाहरी सूर्य से उसका भीतरी समकक्ष माँगता है: निर्मल बोध। संसार पर चमकने वाले को ग्यारह बार प्रणाम कर चुका साधक अब यह माँगता है कि कुछ मन के भीतर भी चमकने लगे।
कब जपें
सूर्य नमस्कार चक्र के बारह नामों में से एक — सूर्योदय पर प्रति आसन एक नाम, या रविवार के जाप में बारहों नाम एक साथ। जब प्रार्थना बोध के लिए हो, तब समापन भास्कर से होता है — विद्यार्थी, शिक्षक, और कठिन गुत्थी सुलझाने वाला हर व्यक्ति।
शब्द-दर-शब्द
- ॐoṁ
- प्रणव, आदि नाद
- भास्करायbhāskarāya
- प्रकाश और प्रज्ञा के कर्ता
- नमःnamaḥ
- प्रणाम, नमन
स्रोत: सूर्य नमस्कार मंत्र-क्रम (सूर्य के पारंपरिक बारह नाम)

