सूर्य
भानु — दीप्तिमान (सूर्य के बारह नामों में चौथा)
ॐ भानवे नमः
Oṁ Bhānave Namaḥ
सरल उच्चारण: Om bhaa-na-ve na-mah
इस मंत्र के विषय में
भानु — 'प्रकाशमान' — चौथा नाम: सूर्य का शुद्ध प्रकाश-रूप में वंदन — न ताप, न प्रताप; केवल यह कि वे चमकते हैं और सब कुछ दृश्य हो जाता है। बारह नामों में यह सरलतम है — और अथाह भी।
अर्थ
ॐ, भानु को प्रणाम — शुद्ध प्रकाश-रूप सूर्य। आँख जो कुछ भी कभी देखेगी, उधार के उजाले में देखेगी; यह मंत्र एक श्वास ठहरकर उस उधार देने वाले का धन्यवाद है। भानु को नमन करना दृश्यों से पहले स्वयं 'देखने' को देख लेना है।
कब जपें
सूर्य नमस्कार चक्र के बारह नामों में से एक — सूर्योदय पर प्रति आसन एक नाम, या रविवार के जाप में बारहों नाम एक साथ। भानु का जाप निर्मल दृष्टि की साधना के लिए है — अध्ययन, लेखन, और हर वह कार्य जिसमें स्पष्ट देखना ही पूरा काम है।
शब्द-दर-शब्द
- ॐoṁ
- प्रणव, आदि नाद
- भानवेbhānave
- दीप्तिमान
- नमःnamaḥ
- प्रणाम, नमन
स्रोत: सूर्य नमस्कार मंत्र-क्रम (सूर्य के पारंपरिक बारह नाम)

