नवग्रह
केतु ग्रह मंत्र
ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः
Oṁ srāṁ srīṁ srauṁ saḥ ketave namaḥ
सरल उच्चारण: Om sraam sreem sraum sah ke-ta-ve na-mah
इस मंत्र के विषय में
केतु — चन्द्रमा के दक्षिण छाया-बिंदु — का बीज-मंत्र; दूसरा छाया-ग्रह, उसी ग्रहण-कथा का सिर-कटा धड़, जिसका अपना कोई वार नहीं। ज्योतिष केतु को वैराग्य, मोक्ष और गूढ़ अंतर्दृष्टि का कारक मानता है।
अर्थ
ॐ — 'स्रां स्रीं स्रौं सः' बीजाक्षरों सहित — केतु (दक्षिण छाया-बिंदु) को प्रणाम — जो जिया जा चुका, उसकी ध्वजा। केतु छुड़ाते हैं, हटाते हैं। जाप प्रार्थना है कि यह छूटना हानि नहीं, मुक्ति हो — वह वैराग्य जो अंतर्दृष्टि में, और अंततः मोक्ष में, खुले।
कब जपें
ग्रहण-काल के आसपास और ग्रह-शांति में; इसे वे जपते हैं जो वैराग्य साध रहे हों — स्वीकारे हुए अंत, पचाई हुई हानियाँ, और मोक्ष की खोज।
शब्द-दर-शब्द
- ॐoṁ
- प्रणव
- स्रां स्रीं स्रौं सःsrāṁ srīṁ srauṁ saḥ
- इस ग्रह के बीजाक्षर
- केतवेketave
- केतु के लिए
- नमःnamaḥ
- प्रणाम, नमन
स्रोत: नवग्रह बीज-मंत्र परंपरा (ज्योतिष / ग्रह-शांति)
टिप्पणी: यहाँ प्रचलित रूप दिया गया है; कुल और क्षेत्रीय परंपराओं में शब्द-रूप थोड़ा भिन्न हो सकता है।

