नवग्रह
गुरु (बृहस्पति) ग्रह मंत्र
ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः
Oṁ grāṁ grīṁ grauṁ saḥ gurave namaḥ
सरल उच्चारण: Om graam greem graum sah gu-ra-ve na-mah
इस मंत्र के विषय में
बृहस्पति — देवगुरु — का बीज-मंत्र; गुरुवार का नाम उन्हीं से है। ज्योतिष गुरु को ज्ञान, धर्म, संतान, भाग्य और गुरुजनों का कारक मानता है।
अर्थ
ॐ — 'ग्रां ग्रीं ग्रौं सः' बीजाक्षरों सहित — देवगुरु बृहस्पति को प्रणाम। गुरु विस्तार हैं — ज्ञान, भाग्य, संतति, श्रद्धा। जाप सही दिशा में बढ़त की प्रार्थना है: जीवन वैसे बड़ा हो जैसे वटवृक्ष होता है — छाया समेत।
कब जपें
गुरुवार; विद्या और गुरुजनों के लिए, विवाह-सम्बन्धी विषयों में, और विस्तार के अवसरों पर — नई शिक्षा, संतान, नया दायित्व।
शब्द-दर-शब्द
- ॐoṁ
- प्रणव
- ग्रां ग्रीं ग्रौं सःgrāṁ grīṁ grauṁ saḥ
- इस ग्रह के बीजाक्षर
- गुरवेgurave
- गुरु (बृहस्पति) के लिए
- नमःnamaḥ
- प्रणाम, नमन
स्रोत: नवग्रह बीज-मंत्र परंपरा (ज्योतिष / ग्रह-शांति)
टिप्पणी: यहाँ प्रचलित रूप दिया गया है; कुल और क्षेत्रीय परंपराओं में शब्द-रूप थोड़ा भिन्न हो सकता है।

