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Dharamkira
त्योहार पंचांग
नदी किनारे शिला पर बैठी वीणा बजाती देवी सरस्वती, पास में मोर — राजा रवि वर्मा का चित्र।
देवी सरस्वतीराजा रवि वर्मा, 1896 painting; Ravi Varma Press print c. 1930

सरस्वती

वसंत पंचमी

वसंत का प्रथम दिवस — और सरस्वती, विद्या तथा अध्ययन के शुभारंभ का दिन।

शुक्रवार, 23 जनवरी 2026गुरुवार, 11 फ़रवरी 2027

तिथि: माघ शुक्ल पंचमी

सबसे सरल शब्दों में

वसंत का पहला दिन और विद्या का जन्मदिन: पीले कपड़े पहनते हैं, किताबें माँ सरस्वती के पास रखते हैं, और उनसे तेज़ बुद्धि माँगते हैं।

कथा और उद्देश्य

वसंत पंचमी को वसंत के आगमन के साथ वाणी, संगीत और ज्ञान की देवी की पूजा होती है। घर और विद्यालय पीले रंग में सज जाते हैं — पकती सरसों और प्रखर बुद्धि का रंग।

यह विद्यारंभ का शास्त्रीय दिन है — देवी की साक्षी में बालक के प्रथम अक्षर।

क्या किया जाता है

सरस्वती पूजा

श्वेत पुष्प, पीली मिठाई, और देवी के चरणों में पुस्तकें, वाद्य या उपकरण।

विद्यारंभ

बच्चे प्रथम अक्षर लिखते हैं; विद्यार्थी नए विषय आरंभ करते हैं।

सरस्वती जाप

ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः — 21 या 108 बार।

श्रेष्ठ समय

पूजा पंचमी तिथि में पूर्वाह्न के समय श्रेष्ठ मानी जाती है।

सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।

जानने योग्य

  • बंगाल में पूजा के दिन पुस्तकें और कलम देवी के चरणों में विश्राम करती हैं — विद्यार्थी अगली सुबह उन्हें वापस लेने तक न पढ़ते हैं, न लिखते हैं।

  • अनेक घरों में पीले चावल या केसरी हलवा इस दिन का नैवेद्य है।

  • पंजाब में इस दिन पतंगें चढ़ती हैं; बंगाल में आम का पहला बौर देवी को अर्पित होता है।

इस पर्व के मंत्र