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Dharamkira
त्योहार पंचांग
जल पर शेषनाग की कुंडली पर विराजमान विष्णु, पीछे उठे नाग-फन, दोनों ओर उनकी पत्नियाँ — राजा रवि वर्मा पर आधारित क्रोमोलिथोग्राफ।
शेष पर अपनी दो पत्नियों सहित विष्णुराजा रवि वर्मा के चित्र पर आधारित क्रोमोलिथोग्राफ, c. 1890s

जीमूतवाहन

जीवित्पुत्रिका (जितिया)

संतान के जीवन के लिए माँ का निर्जल दिवस — पंचांग की सबसे प्रचंड कोमलता।

बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल
शनिवार, 3 अक्टूबर 2026गुरुवार, 23 सितंबर 2027

तिथि: आश्विन कृष्ण अष्टमी (उत्तर) · भाद्रपद कृष्ण अष्टमी (पश्चिम-दक्षिण)रात वही है

आप कौन-सा पंचांग मानते हैं?

शुक्ल पक्ष का नाम हर जगह एक ही है। कृष्ण पक्ष उत्तर में एक मास का होता है और महाराष्ट्र, गुजरात व दक्षिण में उससे पिछले मास का — रात वही, नाम दो, और दोनों सही। चुनाव केवल इसी उपकरण पर रहता है।

सबसे सरल शब्दों में

संतान की लम्बी उम्र के लिए माँ का व्रत — निर्जल और उसके प्रेम-सा प्रचण्ड; बिहार से नेपाल तक रखा जाता है, पारण अगले दिन।

कथा और उद्देश्य

व्रत का नाम विद्याधर-कुमार जीमूतवाहन से है, जो नाग-युवक के स्थान पर बलि-शिला पर स्वयं लेट गए और गरुड़ ने उन्हें ही उठाया। माँ के विलाप और पराए के लिए इस दया से द्रवित गरुड़ ने नाग-बलि सदा के लिए रोक दी। माताएँ वही करुणा-कवच अपनी संतान पर माँगती हैं।

जितिया तीन दिन चलता है — नहाय-खाय की शुद्धि, खुर जितिया का निर्जला दिवस, और पारण। भोर-पूर्व के भोजन (ओठगन) के साथ दादियाँ-नानियाँ व्रत माताओं को सौंपती हैं; यह कहीं भी रखे जाने वाले कठोरतम — और सबसे निर्विवाद — व्रतों में है।

क्या किया जाता है

नहाय-खाय

प्रथम दिवस: स्नान, सात्त्विक भोजन, संकल्प।

निर्जला जितिया

स्वास्थ्य अनुमति दे तो अष्टमी निर्जल; संध्या को जीमूतवाहन-कथा।

जितिया धागा

लाल-पीला जितिया डोरा — या चाँदी की जितिया — संतान के नाम धारण।

पारण

अगली प्रातः — झोर-भात, नोनी साग, मड़ुआ रोटी की आंचलिक रीति से।

श्रेष्ठ समय

अष्टमी भोर में संकल्प; गोधूलि में कथा; पारण अगली प्रातः।

सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।

जानने योग्य

  • जीमूतवाहन-कथा शास्त्रीय रंगमंच भी है — सम्राट हर्ष का 'नागानंद' नाटक तेरह शताब्दी पूर्व इसे मंचित कर चुका है।

  • मिथिला में चिल्हो-माछ और मड़ुआ संतान-समृद्धि के लोक-प्रतीक हैं।

  • नेपाल के थारू और मैथिल समाज जितिया को तीन-दिवसीय महापर्व रूप में मनाते हैं।

इस पर्व के मंत्र